जरुरी जानकारी | भारत की वास्तविक आर्थिक वृद्धि दर 2021-22 में नौ प्रतिशत रहने का अनुमान : रिपोर्ट

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वास्तविक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष (2021-22) और अगले वित्त वर्ष (2022-23) में नौ प्रतिशत रहने का अनुमान है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

मुंबई, 28 दिसंबर देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वास्तविक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष (2021-22) और अगले वित्त वर्ष (2022-23) में नौ प्रतिशत रहने का अनुमान है। एक रिपोर्ट में यह कहा गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड-19 के नए स्वरूप ओमीक्रोन को लेकर चिंता के बावजूद अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर ऊंची रहने का अनुमान है।

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही जुलाई-सितंबर में आर्थिक वृद्धि दर 8.4 प्रतिशत रही है। वहीं पहली तिमाही अप्रैल-जून में अर्थव्यवस्था 20.1 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी।

घरेलू रेटिंग एजेंसी इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘हम अर्थव्यवस्था के संगठित और असंगठित क्षेत्रों के बीच स्पष्ट ‘के’ आकार के पुनरूद्धार के साथ चालू वित्त वर्ष में नौ प्रतिशत की वृद्धि दर के अपने अनुमान पर कायम हैं।’’

‘के’ आकार के पुनरुद्धार से आशय नरमी के बाद अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग पुनरुद्धार के स्तर से है।

उन्होंने कहा कि अगले वित्त वर्ष में भी भारतीय अर्थव्यवस्था नौ प्रतिशत की दर से बढ़ेगी।

नायर ने उम्मीद जताई कि मार्च, 2022 तक दोनों टीके लगा चुके वयस्कों की संख्या बढ़कर 85-90 प्रतिशत हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि बूस्टर खुराक और 15-18 आयु वर्ग के लिए टीकों की घोषणा का स्वागत है, लेकिन अभी यह देखा जाना बाकी है कि क्या मौजूदा टीके ओमीक्रोन के खिलाफ सुरक्षा देने में सक्षम रहेंगे या नहीं, जिससे देश में महामारी की तीसरी लहर को रोका जा सके।

उन्होंने कहा कि कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए कई राज्यों द्वारा अंकुश लगाए जा रहे हैं जिससे आर्थिक पुनरुद्धार अस्थायी रूप से बाधित हो सकता है। विशेषरूप से इससे चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में संपर्क-गहनता वाले क्षेत्र प्रभावित हो सकते हैं।

नायर ने कहा कि अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था का विस्तार अधिक अर्थपूर्ण और मूर्त होगा। यह चालू वित्त वर्ष में आधार प्रभाव की वजह से हुए विस्तार की तरह नहीं होगा।

रेटिंग एजेंसी ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के जो आंकड़े उपलब्ध हैं उनसे इस बात का स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) का सतत और टिकाऊ वृद्धि का मानदंड पूरा हुआ है, जिसके आधार पर वह फरवरी, 2022 में नीतिगत रुख में बदलाव कर इसे तटस्थ करे।

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