देश की खबरें | भारतीय वायुसेना ने मार्शल अर्जन सिंह को दी श्रद्धांजलि

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नयी दिल्ली, 15 अप्रैल भारतीय वायुसेना ने शुक्रवार को महान योद्धा और वायुसेना के दिवंगत मार्शल अर्जन सिंह की 103वीं जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

वायुसेना ने कहा, ‘‘आज के दिन हम भारतीय वायुसेना और राष्ट्र के प्रति मार्शल के योगदान को याद करते हैं।’’भारतीय सेना के इतिहास में नायक के रूप में जगह बना चुके मार्शल ने 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया था।

अर्जन सिंह एकमात्र अधिकारी हैं, जिन्हें वायुसेना के मार्शल पद पर पहुंचने का गौरव हासिल है। यह पद थल सेना के पांच सितारा फील्ड मार्शल के बराबर होता है।

एक निडर और अद्वितीय पायलट के रूप में सिंह ने 60 से अधिक प्रकार के विमानों में उड़ान भरी। अर्जन सिंह का निधन 16 सितंबर, 2017 को 98 वर्ष की आयु में हुआ।

वायुसेना का रूपांतरण करके इसे विश्व की एक सक्षम हवाई ताकत बनाने में अर्जन सिंह ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारतीय वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है।

वर्ष 2002 के गणतंत्र दिवस समारोह के दिन सिंह को मार्शल पद प्रदान करके सम्मानित किया गया। सेना के केवल दो जनरल सैम होर्मूसजी फ्रेमजी जमशेदजी मानेकशॉ और केएम करिअप्पा को फिल्ड मार्शल के पद से सम्मानित किया गया है।

उन्होंने 44 वर्ष की उम्र में 1 अगस्त, 1964 को चीफ ऑफ एअर स्टाफ (सीएएस) का पदभार ग्रहण किया। सिंह का जन्म 15 अप्रैल, 1919 में लायलपुर (अब पाकिस्तान का फैसलाबाद) में हुआ था।

वायुसेना ने बयान जारी करके कहा कि वर्ष 1965 में सिंह को रणभूमि में परीक्षा देनी पड़ी, जब पाकिस्तान ने ‘‘ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम’’ के तहत देश के अखनूर शहर को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

बयान के मुताबिक अर्जन सिंह को रक्षा मंत्री के कार्यालय में बुलाकर वायुसेना की मदद का अनुरोध किया गया। इस दौरान सिंह से पूछा गया कि भारतीय वायुसेना कितनी जल्दी अभियान के लिए तैयार हो सकती है? इस पर सिंह का जवाब था-एक घंटा।

इसके बाद भारतीय वायुसेना ने महज एक घंटे में पाकिस्तान के हमले का जवाब देना शुरू कर दिया जिसका परिणाम जीत के रूप में देखने को मिला। वर्ष 1965 के युद्ध में अहम भूमिका निभाने के लिए सिंह को पद्म विभूषण अवार्ड से सम्मानित किया गया।

वायुसेना ने बताया कि सिंह स्विट्जरलैंड, होली सी और लिचटेंस्टीन में भारत के राजदूत रहे। इसके अलावा वह केन्या और नैरोबी में 1974 से 1977 के दौरान भारत के उच्चायुक्त रहे।

वह अल्पसंख्यक आयोग में 1978 से 1981 तक सदस्य रहे। सिंह वर्ष 1989 से 1990 तक दिल्ली के उपराज्यपाल रहे।

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