देश की खबरें | हिंद महासागर क्षेत्र में भारत सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभा सकता है : रक्षा मंत्री

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभा सकता है क्योंकि इस क्षेत्र में भू-राजनैतिक तौर पर वह विश्वसनीय भागीदार है।

बेंगलुरु, तीन फरवरी रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत सुरक्षा प्रदाता की भूमिका निभा सकता है क्योंकि इस क्षेत्र में भू-राजनैतिक तौर पर वह विश्वसनीय भागीदार है।

सिंह ने कहा, ‘‘हम चुनौतीपूर्ण भू-राजनीतिक परिदृश्य में रहते हैं जहां देशों को ना केवल सैन्य आक्रामकता का खतरा है बल्कि पिछले एक साल में तबाही मचाने वाली कोविड-19 जैसी महामारी समेत प्राकृतिक आपदाओं के खतरे का भी सामना करना पड़ा है।’’

‘एयरो इंडिया’ में वायु सेना प्रमुखों के सम्मेलन के शुरुआती सत्र में रक्षा मंत्री ने कहा कि इसलिए हम कई आयामों पर खतरे का सामना कर रहे हैं। देशों के लिए यह जरूरी है कि वे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर सहयोगात्मक दृष्टिकोण साझा करते हुए अपने संबंध मजबूत बनाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक रूप से भारत एक विश्वसनीय भागीदार है और क्षेत्र में सुरक्षा प्रदाता के तौर पर भूमिका निभा सकता है।’’

उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने में वायु ताकत की भूमिका महत्वपूर्ण बनी रहेगी। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय वायु सेना लड़ाकू क्षमता के मामले में अग्रणी है और उसके पास रफ्तार, ताकत और सटीक निशाना साधने की दक्षता है।

उन्होंने कहा कि हालिया संघर्षों ने उभरती प्रौद्योगिकियों की क्षमता को भी दिखाया है और भारत ने इन क्षमताओं के निर्माण पर पूरा ध्यान केंद्रित किया है।

सिंह ने कहा, ‘‘हम जानकारी साझा करने और सह-उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने के साथ इन अत्याधुनिक प्रौद्योगियों में अपने रक्षा भागीदारों के साथ सहयोग करने को इच्छुक हैं।’’

अधिकारियों ने कहा कि वायु सेना प्रमुखों के सम्मलेन में 26 देशों ने प्रत्यक्ष तरीके से भागीदारी की है जबकि 14 देशों ने डिजिटल तरीके से मौजूदगी दर्ज करायी है।

वायु सेना प्रमुख राकेश कुमार सिंह भदौरिया ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘हम हालिया वर्षों में भू-राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव के गवाह बने हैं। हम अनिश्चितता, अस्थिरता और अन्य खतरों का सामना कर रहे हैं।’’

भदौरिया ने कहा कि एक तरफ दुनिया महामारी को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है वहीं देशों के बीच संबंधों में तनाव भी बढ़े है, अविश्वास की भावना बढ़ी है। इन सब कारणों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परिपक्व और संतुलित सहयोग के महत्व को फिर से रेखांकित किया है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें आपसी समझ और सहयोग, तालमेल के सिद्धांतों पर आधारित मौजूदा सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना चाहिए।’’

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