देश की खबरें | पिछले नौ वर्षों में चीन से लगी सीमा पर बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है : जयशंकर

नयी दिल्ली, सात अगस्त विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत ने पिछले नौ वर्षों में चीन से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिससे किसी भी सुरक्षा चुनौती से निपटने में देश की संपूर्ण सैन्य तैयारियों को मजबूती मिली है।

उन्होंने पत्रकारों के एक समूह से बातचीत के दौरान कहा कि भारत और चीन ने पिछले नौ वर्षों में वार्ता के जरिये पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले पांच-छह स्थानों पर प्रगति की है तथा शेष मुद्दों का समाधान करने के लिए प्रयास जारी है।

जयशंकर ने कहा कि सीमा को सुरक्षित करने और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में (नरेन्द्र) मोदी सरकार की प्रतिबद्धता उत्तरी सीमांत पर महत्वपूर्ण ढांचे को मजबूत करने पर इसके जोर देने के रूप में प्रदर्शित हुई है।

उन्होंने कहा कि कड़ी टिप्पणी करना गंभीरता का प्रतीक नहीं है और बुनियादी ढांचे पर जोर देने जैसा व्यावहारिक कार्य मायने रखता है क्योंकि इसने सैनिकों की प्रभावी तरीके से तैनाती में मदद की है।

उनकी यह टिप्पणी सीमा विवाद से निपटने के सरकार के तौर-तरीके की कांग्रेस द्वारा आलोचना किये जाने की ओर लक्षित प्रतीत होती है।

जयशंकर ने कहा कि जिन्होंने सीमा पर बुनियादी ढांचे को नजरअंदाज किया है वे (चीन के साथ) स्थिति को लेकर चिंतित नहीं थे।

विदेश मंत्री ने सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास नहीं करने की अतीत की नीति की भी आलोचना की और कहा कि एलएसी पर चीन की गश्ती 2000 के आसपास से बढ़ी है क्योंकि चीन ने सीमांत पर सड़कें एवं पुल बनाये हैं।

जयशंकर ने कहा कि भारत सड़कें, पुल और सुरंगों के निर्माण के मद्देनजर पूर्वी लद्दाख में सीमा विवाद के बाद 2020 में शीघ्रता से अपने सैनिक तैनात कर सका था। उन्होंने हैरानी जताई कि यदि 2014 में झड़प हुई होती, तो क्या होता।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार सेना के उपयोग के लिए और सीमांत क्षेत्रों में रह रहे लोगों के जीवन को सहज बनाने के उद्देश्य से उत्तरी सीमा पर सड़कें, पुल, सुरंगें और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण पर तत्परता से ध्यान दे रही है।

विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के लिए अनुमानित आवंटन इस साल 14,387 करोड़ रुपये है जो 2013-14 में 3,782 करोड़ रुपये था। इस तरह इसमें चार गुना वृद्धि हुई है।

उन्होंने लद्दाख सेक्टर में दारबुक-श्योक-दौलत बेग ओल्डी और उमलिंग ला दर्रा के महत्व का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में चुशुल से डेमचोक तक एक सड़क निर्माण का कार्य शुरू कर दिया गया है।

उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में 30,000 करोड़ रुपये की लगात से 1,800 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया जाएगा।

पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद पर सरकार की विपक्ष द्वारा आलोचना को खारिज करते हुए जयशंकर ने कहा कि समस्याएं मौजूद हैं और दोनों पक्ष (भारत-चीन) समाधान करने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत और चीन के बीच, पूर्वी लद्दाख में टकराव वाले कुछ स्थानों पर तीन साल से अधिक समय से गतिरोध बना हुआ है। दोनों पक्षों ने व्यापक कूटनीतिक और सैन्य वार्ता के बाद कई इलाकों से सैनिकों को वापस भी बुलाया है।

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘पिछले तीन वर्षों में प्रमुख बिंदुओं पर कुछ समाधान तलाशे गये हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘पैंगोंग, गलवान, और हॉट स्प्रिंग्स सहित पांच-छह इलाके हैं जहां बहुत अधिक तनाव है। वहां स्थिति में सुधार हुआ है। पूर्ण समाधान नहीं हुआ है लेकिन वार्ता जारी है।’’

उन्होंने कहा वार्ता प्रक्रिया रूकी नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी, कूटनीति में वक्त लगता है। ये जटिल मुद्दे हैं।’’

जयशंकर ने कहा, ‘‘यदि आप पूछेंगे कि क्या 2014 के बाद चीन की किसी गतिविधि का बेहतर तरीके से मुकाबला किया जा सकता है तो इसका जवाब ‘हां’ है।’’

जयशंकर ने कहा कि बांग्लादेश, नेपाल और भूटान के साथ भी ‘कनेक्टिविटी’ को बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम भूटान और असम के बीच रेल लिंक पर वार्ता कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि भारत, म्यांमा के साथ एक तटीय जहाजरानी समझौता करने पर भी विचार कर रहा है।

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