देश की खबरें | ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में श्रीकृष्ण और राधा की मूर्तियों को कीमती जेवरों से सजाया गया, सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

ग्वालियर, 12 अगस्त मध्यप्रदेश के ग्वालियर के ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण और राधाजी की मूर्तियों को लगभग आठ करोड़ रुपये के सोने और कीमती नगों से जड़े जेवरों से सजाया गया है। ये जेवरात सिंधिया राजवंश द्वारा ग्वालियर नगर निगम को दिये गये हैं।

कोरोना वायरस महामारी के चलते इस बार मंदिर में भक्तों को प्रवेश नहीं दिया जा रहा है और दर्शन के लिये मंदिर के बाहर बड़े-बड़े टीवी स्क्रीन लगाये गये हैं। इसके साथ ही भक्तों को फेसबुक लाइव के जरिये भी दर्शन की सुविधा उपलब्ध कराई गयी है। मंदिर में भगवान के जेवरों की सुरक्षा के लिए हथियारों से लैस पुलिस बल को तैनात किया गया है।

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ग्वालियर के फूलबाग में सिंधिया रियासतकालीन गोपाल मंदिर है। इस मंदिर में राधा-कृष्ण की प्राचीन प्रतिमा है और हर साल जन्माष्टमी के पर्व पर प्रतिमाओं को सोने-चांदी के जेवरात पहनाए जाते हैं।

ये जेवरात सिंधिया राजवंश ने ग्वालियर नगर निगम को सौंप दिए थे। देश की आजादी के बाद ये जेवर बैंक के लॉकर में रखे रहे तथा वर्ष 2007 से इन जेवरों को फिर से निकाला गया और जन्माष्टमी पर इनसे राधा-कृष्ण की प्रतिमा का श्रृंगार किया जाता है।

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नगर निगम के आयुक्त संदीप माकिन ने बताया, ‘‘बुधवार को जन्माष्टमी पर पुलिस बल की सुरक्षा में बैंक लॉकर से जेवर, श्रृंगार सामग्री और चांदी के बर्तन लाए गए। पूजा अर्चना के बाद राधा-कृष्ण की प्रतिमा का श्रंगार किया गया। रात्रि एक बजे के बाद ये जेवर जिला कोषालय में रखे जाएंगे। इसके बाद सुबह इन गहनों को बैंक की लॉकर में रख दिया जायेगा।’’

उन्होंने बताया कि राधा-कृष्ण के श्रृंगार में करीब आठ करोड़ रुपये के जेवर व अन्य सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसमें सफेद मोती वाला पंचगढ़ी हार लगभग आठ लाख रुपये कीमत का, सात लढ़ी हार जिसमें 62 असली मोती और 55 पन्ने हैं, इसकी कीमत करीब 25 लाख रुपये है। इसके अलावा सोने के तोड़े तथा सोने का मुकुट कृष्ण भगवान पहने हुए हैं, जिनकी कीमत भी लगभग 80 लाख रुपये है। राधाजी का ऐतिहासिक मुकुट जिसमें पुखराज और माणिक जड़ित के पंख हैं तथा बीच में पन्ना लगा है। तीन किलोग्राम वजन के इस मुकुट की कीमत लगभग पांच करोड़ रुपये आंकी गई है तथा इसमे लगे 16 ग्राम पन्ने की कीमत लगभग 25 लाख आंकी गई है।

उन्होंने बताया कि राधा-कृष्ण के श्रृंगार के लिये लगभग 25 लाख रूपये के जेवर उपलब्ध हैं जिनमें श्रीजी तथा राधाजी के झुमके, सोने की नथ, कंठी, चूड़ियां, कड़े इत्यादि से भगवान को सजाया गया है।

माकिन ने बताया कि भगवान के भोजन इत्यादि के लिये भी प्राचीन बर्तनों की सफाई करके इस दिन इसमें भगवान को भोग लगाया गया है। लगभग 80 लाख रू. कीमत के चांदी के विभिन्न बर्तनों से भगवान की भोग आराधना की गई है। इसमें भगवान की समई, इत्र, पिचकारी, धूपदान, चलनी, सांकड़ी, छत्र, मुकुट, गिलास, कटोरी, कुंभकरिणी, निरंजनी आदि सामग्री का भी प्रदर्शन किया जा रहा है।

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