नयी दिल्ली, 19 फरवरी उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने रविवार को कहा कि मध्यस्थता कार्यवाही में शामिल पक्षों को बहुस्तरीय समीक्षा के जरिये लड़ाई को जारी रखने के बजाय मध्यस्थता निर्णय को स्वीकार करना सीखना चाहिए।
साथ ही, उन्होंने ‘वर्चुअल’ अदालती सुनवाई से कार्यक्षमता का स्तर बढ़ने की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रणाली का उपयोग करना जरूरी है, जिसके लिए एक वृहद अवसंरचना तैयार की गयी है तथा सरकार ने काफी मात्रा में राशि मंजूर की है।
न्यायमूर्ति कौल ने चार दिवसीय ‘दिल्ली मध्यस्थता सप्ताहांत’ के समापन सत्र में अपने संबोधन में कहा, ‘‘पक्षों को मध्यस्थता निर्णय को स्वीकार करना सीखना चाहिए तथा दुर्भाग्य से सार्वजनिक क्षेत्र को इसकी और जरूरत है। साथ ही, महज औपचारिकता पूरी करने के लिए दो या त्रिस्तरीय समीक्षा के जरिये लड़ाई जारी रखने की कोई जरूरत नहीं है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह कुछ ऐसी चीज है, जिस बारे में मैं आश्वस्त हो सकता हूं कि कानून मंत्री इस पर गौर करेंगे।’’
केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रीजीजू समापन समारोह में मुख्य अतिथि थे। न्यायमूर्ति कौल ने कहा कि दुनिया में कोविड-19 महामारी आने पर, अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता समुदाय ‘वर्चुअल’ प्रणाली की ओर बढ़ा था तथा धीरे-धीरे ‘वर्चुअल’ या ‘हाईब्रिड’ सुनवाई की प्रणाली चलन बन जाएगी और अदालत कक्ष में शारीरिक उपस्थिति के साथ सुनवाई महज अपवाद होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘ न्याय के पहिये को यथासंभव आगे बढ़ाते रहने के लिए हमने अदालतों में वर्चुअल सुनवाई शुरू की तथा विकाशशील देश होने के नाते भारत में अवसंरचना एवं संपर्क की समस्याएं आईं, लेकिन संबंधित पक्षों को इस व्यवस्था को सुचारू बनाने में अधिक वक्त नहीं लगा।’’
उन्होंने ‘मध्यस्थता दृष्टि 2030: भविष्य की दृष्टि’ विषय पर सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘ मैं कहूंगा कि वर्चुअल प्रणाली ने कार्यक्षमता के स्तर को बढ़ाया है और आज भी मैं हाईब्रिड स्तर पर काम करता हूं, जहां मैं वकीलों को वीडियो काफ्रेंस के जरिये पेश होने की अनुमति देता हूं।’’
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