देश की खबरें | कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बगैर कोविड-19 पर वैश्विक डेटा का विश्लेषण करना असंभव:न्यायाधीश प्रतिभा सिंह

नयी दिल्ली,25 जून दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि कोविड-19 वायरस से जुड़े वैश्विक डेटा का कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बगैर विश्लेषण करना संभव नहीं है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) इस महामारी का त्वरित एवं प्रभावी हल तलाशने में एक कारगर औजार हो सकती है।

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न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि इस डेटा के विश्लेषण के लिये जरूरी उपाय की कल्पना रोग का पता लगाने, उसके प्रबंधन, इलाज, रोकथाम में शामिल संस्थाओं और संगठनों की विशाल संख्या पर विचार कर की जा सकती है।

उन्होंने एक वेब सेमिनार में कहा कि कोविड-19 के प्रसार के दौरान वायरस के विभिन्न स्वरूपों के बारे में रिपोर्ट प्राप्त हुई है।

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न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, ‘‘वायरस के परिवर्तित रूप एक समान नहीं हैं और ना ही इसके लक्षण या रोग की गंभीरता एक समान है। दुनिया भर में शोध एवं अनुसंधान कार्य हो रहा है, लेकिन इस वायरस के कारण उत्पन्न हो रहे वैश्विक डेटा के विश्लेषण का कृत्रिम बुद्धिमत्ता के सिवा कोई मानवीय तरीका नहीं है। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘कृत्रिम बुद्धिमत्ता इस महामारी के प्रसार का त्वरित एवं प्रभावी हल तलाशने में एक अत्यंत कारगर औजार हो सकती है। ’’

उन्होंने कहा कि वैश्विक समुदाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता की ताकत से वाकिफ हैऔर जन स्वास्थ्य की हिफाजत के लिये इसका उपयोग बढ़ाने को लेकर विभिन्न कदम उठाये गये हैं।

उन्होंने कहा कि जब तक डेटा कॉपीराइट के जरिये संरक्षित नहीं हो जाता है, इसका उपयोग विश्लेषण एवं शोध के लिये तथा सार्थक परिणाम देने में किया जा सकता है।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता वह गतिविधि है, जिसके द्वारा मशीनों को बुद्धिमान बनाने का काम किया जाता है और इसके तहत मशीन परिस्थितियों के अनुकूल समस्याओं का हल करती है।

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