देश की खबरें | तत्काल प्राथमिकी दर्ज किये जाने से अभियोजन पक्ष के मामले को विश्वसनीयता मिलती है: न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि ऐसे मामलों में जहां सबूत आंशिक रूप से विश्वसनीय और आंशिक रूप से अविश्वसनीय हैं, वहां अदालत को चौकस रहने, सच्चाई की तह तक पहुंचने तथा उसे प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य विश्वसनीय गवाही के माध्यम से पुष्टि करने की आवश्यकता होती है।

नयी दिल्ली, 14 मार्च उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि ऐसे मामलों में जहां सबूत आंशिक रूप से विश्वसनीय और आंशिक रूप से अविश्वसनीय हैं, वहां अदालत को चौकस रहने, सच्चाई की तह तक पहुंचने तथा उसे प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य विश्वसनीय गवाही के माध्यम से पुष्टि करने की आवश्यकता होती है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि जब दो पक्ष आपस में भिड़ते हैं तब तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने से अभियोजन पक्ष के मामले को विश्वसनीयता मिलती है।

न्यायालय ने 2006 के एक हत्या मामले में दोषी ठहराए गए और आजीवन कारावास की सजा पाए चार लोगों को बरी कर दिया।

न्यायमूर्ति बी आर गवई, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय करोल की पीठ ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के नवंबर 2014 के फैसले को चुनौती देने वाली अपील स्वीकार कर लीं।

निचली अदालत ने 2008 में आरोपियों को हत्या का दोषी ठहराया था, जिसके खिलाफ आरोपियों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली थी।

उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपियों की अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद यह मामला शीर्ष अदालत पहुंचा था।

न्यायालय ने ‘पूरी तरह से विश्वसनीय गवाह की श्रेणी’ के बारे में कहा कि अभियोजन पक्ष के लिए ऐसे गवाह की गवाही के आधार पर सजा के लिए दबाव बनाने में कोई कठिनाई नहीं होती है।

पीठ ने कहा, ‘‘पूरी तरह से अविश्वसनीय गवाह की मौखिक गवाही के आधार पर दोषसिद्धि नहीं की जा सकती, लेकिन असली दिक्कत तीसरे तरह के गवाह के मामले में आती है, जहां साक्ष्य आंशिक तौर पर विश्वसनीय और आंशिक तौर पर अविश्वसनीय होते हैं।’’

न्यायालय ने कहा, "ऐसे मामलों में जहां सबूत आंशिक रूप से विश्वसनीय और आंशिक रूप से अविश्वसनीय हैं, वहां अदालत को चौकस रहने, सच्चाई की तह तक पहुंचने तथा प्रत्यक्ष या परिस्थितिजन्य विश्वसनीय गवाही के माध्यम से उसकी पुष्टि करने की आवश्यकता होती है।’’

शीर्ष अदालत के एक पिछले फैसले का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि जैसा कि अदालत ने महसूस किया है कि पिछली दुश्मनी एक दोधारी तलवार है, क्योंकि एक ओर यह मकसद प्रदान कर सकती है तो दूसरी ओर, झूठे मामले में फंसाने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने घटना की "असली वजह को दबाने" का प्रयास किया है।

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