देश की खबरें | अवैध डेयरी, गौशालाओं की कमी है दिल्ली में सड़कों पर आवारा पशुओं के भटकने की वजह : अधिकारी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. अवैध डेयरी की बड़ी संख्या तथा गौशालाओं के लिए जगह की कमी दिल्ली में सड़कों पर अवारा पशुओं के भटकने की वजह है, जिसकी वजह से गाड़ी चलाना कठिन एवं खतरनाक हो जाता है, क्योंकि वे अक्सर वाहनों के सामने आ जाते हैं।

नयी दिल्ली, 17 मई अवैध डेयरी की बड़ी संख्या तथा गौशालाओं के लिए जगह की कमी दिल्ली में सड़कों पर अवारा पशुओं के भटकने की वजह है, जिसकी वजह से गाड़ी चलाना कठिन एवं खतरनाक हो जाता है, क्योंकि वे अक्सर वाहनों के सामने आ जाते हैं।

अधिकारियों ने कहा कि यह समस्या पड़ोसी राज्यों के साथ सीमाएं खुली होने की वजह से और विकट हो जाती है, क्योंकि अन्य राज्यों के मवेशी दिल्ली में प्रवेश कर जाते हैं।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस समस्या पर नियंत्रण के लिये पशुओं और उसके मालिकों की पहचान के वास्ते मवेशियों को माइक्रोचिप लगाने का सुझाव दिया है।

पिछले साल निगम ने 13000 मवेशियों को पकड़ा था और दर्जनों अवैध डेयरी के खिलाफ कार्रवाई की थी।

पिछले महीने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के एक पैनल ने निगम को उसके क्षेत्राधिकार वाले इलाकों में डेयरी फार्म एवं गौशालाओं पर ‘समग्र आंकड़े की कमी’ को लेकर फटकार लगाई थी तथा उसे 30 जून तक डेयरी फार्म पर संपूर्ण आंकड़ा जुटाने को कहा था।

अधिकारी ने माना कि यह मुद्दा ‘बुनियादी ढांचे की कमी’ के चलते नियंत्रण से बाहर है।

शहर में 11 निर्धारित डेयरी कॉलोनियां हैं, जहां एक लाख से अधिक दुधारू पशु पाले जाते हैं। इसके अलावा, पूरे शहर में जगह-जगह बड़ी संख्या में अवैध डेयरी चलायी जा रही हैं।

अधिकारी ने कहा, ‘‘अवारा पशुओं की समस्या काफी गंभीर है। सीमाएं खुली हैं। पशुओं का झुंड दिन में किसी भी समय दिल्ली में घुस सकता है और उसके लिए कोई जवाबदेह नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ आसपास के राज्यों के लोग, जिनकी आजीविका दुधारू पशुओं पर निर्भर है, यहां अपने पशु बेचते हैं और चराने के बहाने लाने के बाद वे बूढे मवेशियों को यहीं छोड़ देते हैं।’’

उन्होंने कहा कि जब निगम के अधिकारी इन मवेशियों को पकड़ने का प्रयास करते हैं, तो इन अवैध पशुओं के मालिक हिंसा पर उतर आते हैं।

एक अधिकारी ने कहा, ‘‘कभी-कभी जब हम अवैध डेयरी के खिलाफ किसी खास इलाके में छापा मारते हैं, तो इन लोगों को उसके बारे में पता चल जाता है और वे अपने पशुओं को छिपा लेते हैं। जब हम उनके घरों पर छापा मारते हैं, तो वे बल प्रयोग करते हैं और हमपर पथराव करते हैं। इसके अलावा, शहर में संकरी गलियां हैं ऐसे में किसी गाय का पता लगाना और उसे पकड़ना बहुत कठिन हो जाता है।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\