देश की खबरें | आईआईटी मंडी की टीम ने सिंधु नदी बेसिन में सूखे और ऊंचाई के बीच संबंध की पड़ताल की

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नयी दिल्ली, 13 जून भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-मंडी ने सिंधु नदी बेसिन के लिए जल प्रबंधन और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों का पता लगाने के लिए क्षेत्र में ऊंचाई और सूखे के बीच संबंध का अध्ययन किया है।

ये निष्कर्ष "एटमोस्टफेयरिक रिसर्च" पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, जनसंख्या में बेतहाशा वृद्धि के कारण पानी की मांग बढ़ रही है लेकिन उपलब्धता सीमित है। पानी की सीमित उपलब्धता, वैश्विक जलवायु परिवर्तन और बाढ़ व सूखे जैसी जल संबंधी घटनाओं से मानव समाज के लिए खतरा पैदा हो गया है।

आईआईटी मंडी में सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग स्कूल में एसोसिएट प्रोफेसर दीपक स्वामी ने कहा, “भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक रिपोर्ट के अनुसार, 1951 से 2016 के बीच भारत में सूखे की आवृत्ति में वृद्धि देखी गई, कई क्षेत्रों में एक दशक में दो से ज्यादा बार सूखा पड़ा। प्रभावी जल प्रबंधन और नियोजन के लिए सूखे से संबंधित पहलुओं को समझना जरूरी है।”

अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र सूखे जैसे जलवायु परिवर्तन प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। अलग-अलग समय पर सूखे की प्रवृत्ति और ऊंचाई के बीच संबंध का विश्लेषण करने से सूखे का अनुमान लगाने और उनके प्रभावों को कम करने के लिए नीतियां बनाने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने कहा, “शोधकर्ताओं ने सिंधु नदी बेसिन पर ध्यान केंद्रित किया है। यह बेसिन भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि उत्पादकता और जल आपूर्ति के मामले में अत्यधिक महत्व रखता है। इसके अलावा, बेसिन के भीतर इलाकों की ऊंचाई समुद्रतल से 93 से लेकर 8,489 मीटर तक है। यह ऊंचाई और सूखे के बीच संबंध का पता लगाने के लिए एक आदर्श स्थिति प्रदान करता है।”

शोध दल ने सूखे के पैटर्न का अध्ययन करने के लिए 42 वर्षों (1979-2020) में मासिक वर्षा और अधिकतम व न्यूनतम तापमान से संबंधित व्यापक डेटा का उपयोग किया।

आईआईटी मंडी में सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग स्कूल में सहायक प्रोफेसर विवेक गुप्ता ने कहा "हमने सूखे और ऊंचाई के बीच एक मजबूत संबंध देखा। 2,000 मीटर से नीचे वाले क्षेत्रों में नमी की प्रवृत्ति का अनुभव हुआ, जबकि 2,000 और 6,000 मीटर के बीच की ऊंचाई में सूखे के हालात दिखे। हालांकि, 4,000 मीटर से अधिक ऊंचे क्षेत्र में सूखे की दर धीमी थी।”

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