देश की खबरें | आईआईटी गुवाहाटी ने इलेक्ट्रिक वाहनों के मानकीकरण के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की
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नयी दिल्ली, चार अप्रैल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, गुवाहाटी (आईआईटी-जी) के शोधकर्ताओं ने अपनी तरह की अनूठी तकनीक विकसित की है जो भारत में ‘‘ड्राइव साइकिल’’ के आधार पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों (ईवी) की मोटर और बैटरी को श्रेणीबद्ध करती है।
अधिकारियों के मुताबिक, फिलहाल बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक गाड़ियां अलग अलग मौसमी स्थितियों को ध्यान में नहीं रखतीं और विकसित की गई ग्रामीण ‘ड्राइव साइकिल’ व शहरी ‘ड्राइव साइकिल्स’ पर ध्यान केंद्रित नहीं करती हैं।
‘ड्राइव साइकिल‘ वाहन बनाम समय की गति का प्रतिनिधित्व करने वाले डेटा बिंदुओं की एक श्रृंखला है। ईंधन की खपत और प्रदूषक उत्सर्जन सहित विभिन्न कारकों के आधार पर वाहनों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए ‘ड्राइविंग साइकिल’ को विकसित किया जाता है।
आईआईटी गुवाहाटी में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग में प्रोफेसर प्रवीण कुमार ने कहा, “ आर्द्र क्षेत्र के लिए विकसित इलेक्ट्रॉनिक ड्राइवट्रेन (घटकों का समूह जो पहियों को ऊर्जा प्रदान करता है) शुष्क और ठंडे वातावरण में काम नहीं करती है। लिहाज़ा, मूल उपकरण निर्माता (ओईएम) अब भारतीय स्थितियों के लिए मानक ड्राइव साइकिल बनाने पर विचार कर रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “फिलहाल, कोई भी ओईएम इस तकनीक का इस्तेमाल नहीं करता और वे भारतीय वाहनों के ‘ड्राइव-साइकिल’ डेटा के लिए अनुरोध करते रहे हैं। इस शोध से उम्मीद है कि यह विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर बेहतर और अधिक प्रभावी ड्राइवट्रेन का निर्माण करेगा। यह स्टार्ट-अप के लिए भी फायदेमंद है। इस शोध का लक्ष्य उत्सर्जन और ईंधन की खपत, दोनों को घटाना है।”
आईआईटी गुवाहाटी की ‘इलेक्ट्रिक मोबिलिटी लेबोरेटरी’ के शोधार्थियों ने ग्रामीण और शहरी इलाकों में भारतीय मौसमी स्थितियों पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने वह तरीका विकसित किया है जो सर्वश्रेष्ठ ड्राइवट्रेन को बनाने का सुझाव देता है।
शोधार्थियों का दावा है कि आईआईटी गुवाहाटी की टीम द्वारा विकसित किया गया ‘ड्राइव-साइकिल’ अनूठा है और कहीं भी उपलब्ध नहीं है।
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