जरुरी जानकारी | इफको, अमूल, नेफेड, कृभको, एनसीडीसी राष्ट्रीय निर्यात सहकारी समिति की प्रवर्तक होंगी
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नयी दिल्ली, 19 जनवरी इफको, जीसीएमएमएफ (अमूल), कृभको, नेफेड और एनसीडीसी हाल में घोषित राष्ट्रीय स्तर की निर्यात सहकारी समिति को संयुक्त रूप से प्रवर्तित करेंगी। यह समिति 2,000 करोड़ रुपये की अधिकृत शेयर पूंजी के साथ सहकारिता क्षेत्र में वस्तुओं और सेवाओं के कारोबार का काम करेगी।
पिछले सप्ताह, मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) ने जैविक उत्पादों, बीजों और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए तीन नई राष्ट्रीय स्तर की बहु-राज्य सहकारी समितियों की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी दी।
मल्टी-स्टेट कोऑपरेटिव सोसायटीज (एमएससीएस) कानून, 2002 के तहत एक राष्ट्रीय स्तर की सहकारी जैविक सोसायटी, सहकारी बीज सोसायटी और सहकारी निर्यात सोसायटी का पंजीकरण किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय निर्यात सहकारी समिति का पंजीकरण जल्द ही पूरा हो जाएगा और यह राष्ट्रीय राजधानी में स्थित होगी।
इस समिति के पास 2,000 करोड़ रुपये की अधिकृत शेयर पूंजी होगी। इस समिति की शुरुआती चुकता शेयर पूंजी 500 करोड़ रुपये है।
चार प्रमुख सहकारी संस्थाएं इफको, कृभको, नेफेड, गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (जीसीएमएमएफ) - जो अमूल ब्रांड के तहत अपने उत्पादों का विपणन करती हैं - और राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) प्रवर्तक कंपनियां रहेंगी और इनमें से प्रत्येक 100 करोड़ रुपये का योगदान देगी।
सहकारी समितियां - प्राथमिक से राष्ट्रीय स्तर तक की - सदस्य के रूप में इस समिति में शामिल होने के लिए पात्र हैं।
एक सूत्र ने कहा कि सहकारी क्षेत्र में देश में उपलब्ध अधिशेष के निर्यात पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
सूत्रों ने कहा कि निर्यात इसी वित्त वर्ष से शुरू होने की संभावना है, और इस निर्यात समिति को एक बड़ा निर्यात घराना बनने में 2-3 साल लगेंगे।
सहकारी समितियों का विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में सहकारी समितियों का उर्वरक उत्पादन में 28.80 प्रतिशत, उर्वरक वितरण में 35 प्रतिशत, चीनी उत्पादन में 30.60 प्रतिशत और दूध के विपणन योग्य अधिशेष की खरीद में 17.50 प्रतिशत का योगदान है।
उन्होंने कहा कि इनमें से कई उत्पादों की कई देशों में भारी मांग है, लेकिन एक अग्रणी सहकारी समिति के अभाव में, सहकारी उत्पादों एवं सेवाओं की निर्यात क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता है।
यह सहकारी समिति वैश्विक मांग का आकलन करेगी और सहकारी उत्पादों/सेवाओं की निर्यात क्षमता का दोहन करेगी। निर्यात योग्य घरेलू अधिशेष, कार्यशील पूंजी, लॉजिस्टिक्स, तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण को परस्पर जोड़ने के लिए उचित संस्थागत समर्थन का प्रावधान भी होगा।
देश में 8.54 लाख पंजीकृत सहकारी समितियां हैं, जिनमें 29 करोड़ से अधिक सदस्य हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में हाशिए पर रहने वाले और निम्न-आय वाले समूहों के होते हैं।
सहकारी समितियों की उपस्थिति लगभग सभी क्षेत्रों में है। उदाहरण के लिए, कृषि (खाद्यान्न, दालें, तिलहन, आदि), बागवानी (फल, सब्जियां, फूल, सुगंधित उत्पाद, आदि), डेयरी, मुर्गी पालन, पशुधन, मत्स्य पालन, चीनी, मसाले, जैविक उत्पाद, उर्वरक, हथकरघा, हस्तकला, कपड़ा, चाय/कॉफी, लघु वनोपज, आयुर्वेदिक/हर्बल दवाएं, प्रसंस्कृत भोजन और चमड़ा जैसे क्षेत्रों में इन समितियों की उपस्थिति है।
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