देश की खबरें | बाल विवाह से निपटने में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए: असम के विशेषज्ञों ने कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. असम में समाज के विभिन्न वर्गों ने रविवार को राज्य सरकार से बाल विवाह के मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से देखने और इस सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए जागरूकता पैदा करने पर अधिक जोर देने की अपील की।
गुवाहाटी, 19 फरवरी असम में समाज के विभिन्न वर्गों ने रविवार को राज्य सरकार से बाल विवाह के मुद्दे को मानवीय दृष्टिकोण से देखने और इस सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए जागरूकता पैदा करने पर अधिक जोर देने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने कुछ दिन पहले अपनी टिप्पणी में कहा था कि असम में बाल विवाह के खिलाफ सख्त कार्रवाई ने लोगों के ‘‘निजी जीवन में तबाही मचाई है।’’
हालांकि, हिमंत विश्व शर्मा नीत राज्य सरकार कह रही है कि बाल विवाह के खिलाफ जारी अभियान को और तेज किया जाएगा। लेकिन विपक्ष ने इस कवायद को ‘संप्रदायिक डिजाइन’ वाला एक ‘राजनीतिक स्टंट’ करार दिया है।
उच्च न्यायालय ने कहा था कि बाल विवाह के मामलों में आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई जरूरत नहीं थी। उच्च न्यायालय ने बाल विवाह के आरोपियों पर यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम-2012 और बलात्कार के आरोप लगाने को लेकर 14 फरवरी को असम सरकार को फटकार भी लगाई थी।
साथ ही, अदालत ने कहा था कि ये ‘बिल्कुल ही विचित्र’ आरोप हैं।
असम सरकार ने तीन फरवरी को बाल विवाह के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी और कथित तौर पर बाल विवाह से जुड़े 3,000 से अधिक लोगों को अब तक गिरफ्तार करके अस्थायी जेलों में रखा गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अंगशुमन बोरा ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘अदालत इस बारे में बिल्कुल सही है कि बाल विवाह के मामलों में गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है। समय से आरोपपत्र दाखिल करना और जागरुकता फैलाना, दो प्रमुख कार्रवाई है जो भविष्य में प्रतिरोधक का काम करेगी।’’
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