समिति ने 18 महीने तक जांच करने के बाद अपनी अंतिम रिपोर्ट में कहा था कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आपराधिक रूप से 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के वैध परिणाम पलटने की एक ‘‘व्यापक साजिश’’ रची और वह अपने समर्थकों को कैपिटल पर हमला करने से रोकने में भी विफल रहे।
समिति के अध्यक्ष बेनी थॉम्पसन और उपाध्यक्ष लिज़ चेनी ने सोमवार को एक विदाई संदेश में कहा, ‘‘भविष्य में किसी भी चुनाव के परिणाम को पलटने की किसी भी अन्य साजिश को विफल करने के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी है। हमने कई सुझाव दिए हैं और आगे की कार्रवाई का जिम्मा अब हमारी न्याय प्रणाली पर है।’’
समिति ने 814 पन्नों की रिपोर्ट पेश की थी। इसके लिए 1,000 से अधिक गवाहों से पूछताछ की गई और लाखों पन्नों के दस्तावेज खंगाले गए।
रिपोर्ट में कहा गया था, ‘‘छह जनवरी की घटना की मुख्य वजह केवल एक शख्स पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप थे, जिनकी बातों का कई लोगों ने अनुसरण किया। उनके बगैर छह जनवरी की कोई घटना नहीं होती।’’
हालांकि, समिति के सुझावों को लेकर न्याय मंत्रालय पर कानूनी कार्यवाही का कोई दबाव नहीं है, क्योंकि संघीय अभियोजक पहले से ही अपनी जांच कर रहे हैं और वे ही ट्रंप के खिलाफ मुकदमा चलाने को लेकर अंतिम फैसला लेंगे।
गौरतलब है कि ट्रंप ने तीन नवंबर 2020 को हुए राष्ट्रपति चुनाव में हार स्वीकार नहीं की थी और उन्होंने चुनाव में धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे। ट्रंप के इन आरोपों के बीच उनके समर्थकों ने छह जनवरी को संसद भवन परिसर में कथित तौर पर हिंसा की थी।
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