विदेश की खबरें | हांगकांग : राष्ट्रीय सुरक्षा के सबसे बड़े मामले में 14 लोकतंत्र समर्थक दोषी, दो बरी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है उनमें पूर्व सांसद लेउंग वोक-हंग, लैम चेउक-टिंग, हेलेना वोंग और रेमंड चैन शामिल हैं। दोषी ठहराये गये लोगों को उम्रकैद की सजा का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अभी सजा नहीं सुनाई गयी है।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

जिन लोगों को दोषी ठहराया गया है उनमें पूर्व सांसद लेउंग वोक-हंग, लैम चेउक-टिंग, हेलेना वोंग और रेमंड चैन शामिल हैं। दोषी ठहराये गये लोगों को उम्रकैद की सजा का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अभी सजा नहीं सुनाई गयी है।

जिन दो समर्थकों को बरी किया गया है उनमें पूर्व जिला काउंसलर ली यू-शुन और लॉरेंस लाउ शामिल हैं लेकिन अभियोजन पक्ष ने बरी किये जाने के फैसले के खिलाफ अपील दाखिल करने की मंशा जताई है।

वर्ष 2021 में एक अनाधिकारिक प्राइमरी चुनाव में संलिप्तता के लिए 47 लोकतंत्र समर्थकों के खिलाफ मुकदमा चलाया गया था। अभियोजन पक्ष ने इन समर्थकों पर हांगकांग सरकार को पंगु बनाने और जरूरी बहुमत हासिल कर शहर के नेता को पदच्युत करने का प्रयास करने का आरोप लगाया था।

पर्यवेक्षकों ने कहा कि यह मामला दर्शाता है कि वर्ष 2019 में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद विपक्ष को कुचलने के लिए कैसे सुरक्षा कानून का इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि बीजिंग और हांगकांग की सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि इस कानून ने शहर में स्थिरता बहाली में मदद की है और न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा की जा रही है।

पर्यवेक्षकों का कहना है कि वर्ष 2020 में इस कानून के लागू होने के बाद से हांगकांग के अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर अभिव्यक्ति और सभाएं करने की आजादी को काफी हद तक सीमित कर दिया है।

उन्होंने कहा कि इस कानून के नाम पर कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, उन्हें चुप करा दिया गया या फिर देश छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया।

1997 में जब ब्रिटेन ने हांगकांग को चीन को लौटाया था तो बीजिंग ने 50 सालों के लिए शहर की पश्चिमी शैली की नागरिक स्वतंत्रता को बनाए रखने का वादा किया था। लेकिन 2020 के कानून के बाद हांगकांग प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर बुरी तरह से अभिव्यक्ति और सभाएं करने की स्वतंत्रता को सीमित कर दिया। बहुत से मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया, चुप करा दिया गया या जबरन स्व निर्वासन में भेज दिया गया। दर्जनों नागरिक समूहों को भंग कर दिया गया।

अमेरिका, आस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के राजनयिकों के साथ ही दर्जनों निवासी अदालत परिसर के बाहर इंतजार करते रहे जो मामले की सुनवाई के लिए अदालत में भीतर जाना चाहते थे।

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