विदेश की खबरें | घर का स्वामित्व न केवल व्यक्तिगत बल्कि राजनीतिक है
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. बर्लिन, 29 मई (360इंफो) राजनीतिक दलों ने कैसे हमारे अपने घरों के मालिक होने की इच्छा को प्रभावित किया है।
बर्लिन, 29 मई (360इंफो) राजनीतिक दलों ने कैसे हमारे अपने घरों के मालिक होने की इच्छा को प्रभावित किया है।
20वीं शताब्दी के अंत में, अधिकांश देशों और यहां तक कि दुनिया के प्रमुख शहरों में अधिकतर निवासी घरों के मालिक थे।
लगभग 20 साल बाद वह तस्वीर काफी हद तक बदल गई है, जिससे कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या घर का स्वामित्व होना एक सपना है जिसे हासिल किया जा सकता है?
यूरोपीय शहरों में सदियों से बड़ी आबादी किरायेदारों की बसावट की रही, हालांकि पिछली शताब्दी में अधिकांश अन्य देशों में घर मालिकों की संख्या में हुई वृद्धि के बीच इन्होंने (यूरोपीय किरायेदारों ने) भी सार्वजनिक आवासीय इकाइयों में तेजी के साथ अपना घर बना लिया।
पूर्व समाजवादी देश राज्य और सहकारी अपार्टमेंट को 1990 के बाद उनमें रह रहे किरायेदारों को देने के माध्यम से मकान मालिक बनाने की दिशा में तेजी से शामिल हो गए।
आदर्श आवास व्यवस्था के बारे में पूछे जाने पर, विकसित अर्थव्यवस्थाओं में अधिकांश परिवारों ने अलग, एकल और पारिवारिक घर के मालिक होने का सपना देखने की बात कही।
हाल ही में किए गए ‘यूगॉव’ सर्वेक्षण के अनुसार, यह विशेष रूप से अंग्रेजी भाषी देशों में नजर आता है, जहां ब्रिटेन में लगभग 40 प्रतिशत लोग और अमेरिका में लगभग 30 प्रतिशत लोग तीन से चार मंजिला इमारत में एक अपार्टमेंट में रहने को अस्वीकार करते हैं।
घर के स्वामित्व का व्यापक सपना न केवल एक व्यक्तिगत बल्कि एक राजनीतिक सपना भी रहा है, जो लगभग सभी लोकतांत्रिक और यहां तक कि सत्तावादी देशों में राजनीतिक दलों द्वारा संजोया गया है।
विकसित अर्थव्यवस्थाओं में, व्यापक आबादी, विशेष रूप से कामकाजी वर्गों के बीच घर के स्वामित्व के प्रसार का आधुनिक विचार, 1830 के दशक में फ्रांस में कपड़ों के लिए चर्चित शहर मुलहाउस में बगीचे वाले घरों को परिवार के लिये किराये पर लेने के बाद खरीदने की योजना में देखा जा सकता है।
स्थानीय नियोक्ताओं और नगर पालिका ने गतिशील श्रमिकों को एक स्थान पर रखने, खर्चों को कम रखने और शुरुआती श्रमिक आंदोलन से होने वाली क्रांति को रोकने का प्रयास किया।
फ्रेडरिक एंगेल्स ने 1872 से 1873 तक प्रकाशित अपने लेखों की प्रसिद्ध ‘द हाउसिंग क्वेश्चन’ श्रृंखला में इस मॉडल की आलोचना की।
एंगेल्स ने घर के स्वामित्व के माध्यम से कामकाजी वर्गों के क्षरण का अनुमान लगाया और आवास को एक बुरे प्रकार का व्यक्तिगत कल्याण माना, क्योंकि जब बेरोजगार श्रमिकों को इसकी सबसे अधिक आवश्यकता होगी आवास की हिस्सेदारी सबसे कम है।
घर के स्वामित्व के विचार ने 19वीं शताब्दी की विश्व प्रदर्शनियों के माध्यम से समाज सुधारकों के बीच एक लंबे बौद्धिक करियर की शुरुआत की और 19 देशों में लगभग 2,000 पार्टी मंचों के विश्लेषण से पता चला है कि अंततः लगभग सभी रूढ़िवादी दलों के पार्टी मंचों में इसने जगह बना ली।
पार्टी के घोषणापत्रों में घर के स्वामित्व का बचाव समाजवाद के खिलाफ दीवार बनाने, श्रमिकों को समाज में हिस्सेदारी देने, सेवानिवृत्ति के बाद आवास की लागत कम करने और परिवारों को मजबूत करने के लिए किया गया था।
लगभग सभी पार्टी मंचों में 1945 के बाद घर के स्वामित्व के लिए राजनीतिक समर्थन व्याप्त हो गया, जब अधिकांश श्रमिक और सामाजिक लोकतांत्रिक पार्टियां इसमें शामिल हो गईं क्योंकि उनके सदस्य और मतदाता ऊपरी पायदान पर बढ़ रहे थे।
हालांकि, वैश्विक वित्तीय संकट के बाद से, कम युवा परिवार कड़ी ऋण शर्तों, बढ़ती हुई कीमतों और हाल ही में, ब्याज दरों में वृद्धि के कारण घर के स्वामित्व के सपने को साकार करने में सक्षम हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने 2010 के दशक को नई पीढ़ी के किराए के दशक के तौर पर बताया है, खासकर घर के लिए सबसे महंगे शहरों में।
पहचानी गई कुछ समस्याओं में विशाल एकल-परिवार वाले घर, अवहनीयता और अंतर-पीढ़ीगत असमानताएं, और अन्य विकल्पों की कमी शामिल थी।
अधिकांश देशों में एक प्रभावी सामाजिक आवास विकल्प के गायब होने के साथ, किराये के क्षेत्र में अप्रत्याशित वापसी देखी गई।
घर के स्वामित्व की दरें अब भी 1900 के पूर्व के स्तर से नीचे नहीं हैं, इसके बावजूद पिछले 20 वर्षों में घर के मालिक बनने वालों की दर में काफी गिरावट आई है और कुछ अनुमानों में और गिरावट आने के संकेत दिए गए हैं।
(360इंफो.ओआरजी)
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