देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई अधिकारी, वकील की जमानत याचिकाएं खारिज कीं

नयी दिल्ली, 23 अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के अधिकारी अभिषेक तिवारी और एक वकील की जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया है। इन लोगों को महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में जांच एजेंसी की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के कथित रूप से लीक होने के संबंध में गिरफ्तार किया गया था।

उच्च न्यायालय ने कहा कि वह राहत देने के लिये इच्छुक नहीं है क्योंकि जांच अभी शुरुआती चरण में है। न्यायालय ने कहा कि यह स्थापित कानून है कि अदालत को न केवल आरोपों की प्रकृति को ध्यान में रखना होगा, बल्कि अगर सबूतों के साथ छेड़छाड़ की आशंका है, तो जमानत से इनकार किया जा सकता है।

न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा, ‘‘मौजूदा प्राथमिकी में आरोप सबूतों के साथ छेड़छाड़ पर आधारित है, इस प्रकार जांच के प्रारंभिक चरण को देखते हुए, मैं इस स्तर पर याचिकाकर्ताओं को जमानत देने के लिए तैयार नहीं हूं। याचिकाएं खारिज की जाती हैं।’’

अदालत ने तिवारी और नागपुर के वकील आनंद दिलीप डागा की जमानत याचिकाओं पर एक साझा आदेश पारित किया।

सीबीआई ने अपने सब-इंस्पेक्टर तिवारी, वकील डागा, जो देशमुख के वकील के रूप में काम कर रहे थे, और अन्य के खिलाफ रिश्वत सहित विभिन्न आरोपों को लेकर मामला दर्ज किया था।

सीबीआई ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और आरोपियों की रिहाई निष्पक्ष जांच के लिए नुकसानदायक हो सकती है। सीबीआई ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपी जांच को प्रभावित कर सकते हैं और सबूतों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं।

तिवारी और डागा ने निचली अदालत के जमानत याचिकाएं खारिज करने संबंधी आदेश को चुनौती दी थी।

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