देश की खबरें | पुलिस हिरासत में दिव्यांग व्यक्ति के कपड़े उतारकर वीडियो बनाए जाने पर एचएचआरसी ने जताई नाराजगी

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चंडीगढ़, 23 जुलाई हरियाणा मानवाधिकार आयोग (एचएचआरसी) ने पुलिस हिरासत में दिव्यांग व्यक्ति को कपड़े उतारने के लिए मजबूर करने और उसका वीडियो बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई तथा इस हरकत को क्रूरतापूर्ण एवं जीवन के अधिकार का प्रत्यक्ष उल्लंघन करार दिया।

आयोग ने हरियाणा गृह विभाग को आदेश दिया है कि वह पीड़ित ‘चार्टर्ड अकाउंटेंट’ को 50,000 रुपये का मुआवजा दे तथा यह राशि घटना में शामिल दो पुलिस अधिकारियों से वसूल की जाए।

फरीदाबाद के निवासी पीड़ित व्यक्ति को उसकी पत्नी द्वारा दर्ज कराए गए एक आपराधिक मामले में मई 2021 में गिरफ्तार किया गया था।

एचएचआरसी को दी गई अपनी शिकायत में, व्यक्ति ने आरोप लगाया कि फरीदाबाद के सारन थाने में हिरासत के दौरान उसके कपड़े उतरवाए गए, अर्ध-नग्न अवस्था में तस्वीरें खींची गईं और वीडियो बनाया गया तथा बाद में ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल कर दी गईं।

उसने कहा कि इस घटना के कारण उसे अत्यधिक मानसिक आघात और सार्वजनिक रूप से अपमान का सामना करना पड़ा तथा यह उनके मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है।

व्यक्ति ने इस अनुभव को ‘‘जीवित मृत्यु के समान’’ बताया और कहा कि मनोवैज्ञानिक आघात की वजह से वह गहरे अवसाद की स्थिति में है।

एचएचआरसी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्रा और सदस्य कुलदीप जैन तथा दीप भाटिया की पीठ ने 16 जुलाई के अपने आदेश में कहा कि आयोग की जांच शाखा द्वारा की गई निष्पक्ष जांच से पुष्टि हुई है कि दो पुलिसकर्मियों - एक सहायक उपनिरीक्षक और एक कांस्टेबल ने वास्तव में हिरासत के दौरान व्यक्ति को कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया था।

आयोग ने कहा कि विशेषकर दिव्यांग व्यक्तियों के साथ इस तरह का क्रूर और अपमानजनक व्यवहार सभ्य समाज में पूरी तरह से अस्वीकार्य है।

आदेश में कहा गया, ‘‘यह घटना संवैधानिक मूल्यों की मूल भावना और मानवीय गरिमा की धारणा को चुनौती देती है। कोई भी व्यक्ति, चाहे उसके खिलाफ कोई भी आरोप क्यों न हो, उसके साथ ऐसा नहीं किया जा सकता। यह कृत्य संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।’’

आयोग के जांच निदेशक की रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, यह पुष्टि हुई है कि 25 मई, 2021 को अर्ध-नग्न हालत में पुलिस हवालात में बंद होने के समय शिकायतकर्ता के एक रिश्तेदार को उसकी तस्वीरें लेने और वीडियो रिकॉर्ड करने की अनुमति दी गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘उक्त तस्वीरें और वीडियो फुटेज बाद में सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिए गए, जिससे शिकायतकर्ता का आघात और बढ़ गया, उसका सार्वजनिक रूप से उपहास उड़ाया गया और उसे गहरा मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचा।”

एचएचआरसी के प्रोटोकॉल और सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी पुनीत अरोड़ा ने बताया कि आयोग के निर्देशानुसार हरियाणा सरकार के गृह विभाग को पीड़ित को 50,000 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया है।

उन्होंने कहा कि यह राशि दोषी पुलिस अधिकारियों से बराबर-बराबर वसूली जाएगी।

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