जरुरी जानकारी | इंडियन आयल को खरीदे कच्चे तेल पर नुकसान से चौथी तिमाही के दौरान 5,185 करोड़ रुपये का भारी घाटा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) को समाप्त वित्त वर्ष 2019- 20 की चौथी तिमाही में 5,185 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ है। कंपनी को इस दौरान पहले से खरीदे गये कच्चे तेल पर दाम घटने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा।

नयी दिल्ली, 24 जून सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी इंडियन आयल कार्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) को समाप्त वित्त वर्ष 2019- 20 की चौथी तिमाही में 5,185 करोड़ रुपये का भारी घाटा हुआ है। कंपनी को इस दौरान पहले से खरीदे गये कच्चे तेल पर दाम घटने के कारण भारी नुकसान उठाना पड़ा।

इंडियन आयल कार्पोरेशन के चेयरमैन संजीव सिंह ने यहां संवाददाताओं को बताया कि पिछले वित्त वर्ष में जनवरी से मार्च 2020 की चौथी तिमाही के दौरान कंपनी को 5,185.32 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ जबकि एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 6,099.27 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा हासिल किया था।

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उन्होंने कहा कि मुख्य तौर से कंपनी के पास जमा कच्चे तेल के का मूल्य गिरने और रिफइानरी मार्जिन घटने की वजह से यह घाटा हुआ। उन्होंने बताया कि 2019- 20 की चौथी तिमाही के दौरान पहले खरीदे गये माल पर कंपनी को 14,692 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा जबकि एक साल पहले इसी अवधि में रखे माल पर 1,787 करोड़ रुपये का फायदा हुआ था।

एक साल पहले जनवरी- मार्च 2019 तिमाही में आईओसी का रिफाइनरी मार्जिन 4.09 डालर प्रति बैरल रहा था लेकिन मार्च 2020 तिमाही में इसमें 9.64 डालर प्रति बैरल का नुकसान कंपनी को हुआ। इसमें यदि खरीदे माल पर नुकसान को हटा दिया जाये तो रिफाइनरी मार्जिन 2.15 डालर प्रति बैरल रहा।

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उल्लेखनीय है कि हाल के कुछ महीनों के दौरान कोरोना वायरस महामारी के फैलने और उसके बाद दुनिया के कई देशों में लगाये गये लॉकडाउन के कारण मांग घटने से विश्व बाजार में कच्चे तेल के दाम में भारी गिरावट देखने को मिली। अब जबकि ज्यादातर देशों ने आर्थिक गतिविधियां धीरे धीरे शुरू कर दी हैं पेट्रोलियम पदार्थों की मांग बढ़ने लगी है और कच्चे तेल के दाम भी बढ़ने लगे हैं।

सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान तमाम परिवहन सुविधायें बंद होने से ईंधन की मांग 70 प्रतिशत तक घट गई थी अब उसमें सुधार आने लगा है और मांग बढ़कर 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसके जून अंत तक या फिर जुलाई के पहले सप्ताह में 90 प्रतिशत तक पहुंच जाने का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल की मांग में उम्मीद से अधिक तेजी आई है। इसकी वजह यह लगती है कि अभी भी ज्यादातर सार्वजनिक परिवहन बंद हैं और निजी वाहनों से आना- जाना हो रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में माल की आवाजाही बढ़ने और अन्य गतिविधियां बढ़ने से डीजल की मांग भी बढ़ रही है।

सिंह ने कहा हालांकि, कोविड- 19 से पहले के स्तर पर मांग को पहुंचने में अभी समय लग सकता है। यह स्तर साल के अंत तक ही हासिल हो पायेगा जब उड्डयन सेवायें और औद्योगिक गतिविधियां पूरी तरह चालू हो जायेंगी। विमानन सेवाओं को मार्च मध्य में बंद कर दिया गया था तब से अब तक आंशिक विमानन सेवायें ही शुरू की गईं हैं।

आईओसी चेयरमैन ने बताया कि कंपनी को 2019- 20 पूरे साल में खरीदे गये माल पर नुकसान और कमजोर रिफाइनरी मार्जिन की वजह से कंपनी का शुद्ध लाभ घटकर 1,313 करोड़ रुपये रह गया। इससे पिछले साल के मुकाबले इसमें भारी गिरावट दर्ज की गई। 2018- 19 में कंपनी को 16,894 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।

वित्त वर्ष 2019- 20 में कंपनी की कुल आय 5,66,950 करोड़ रुपये रही। वहीं इससे पिछले वर्ष में कंपनी ने 6,05,932 करोड़ रुपये का कारोबार किया था। समाप्त वित्त वर्ष के दौरान कंपनी ने निर्यात सहित करीब 9 करोड़ टन उत्पादों की बिक्री की। वहीं मार्च में समाप्त चौथी तिमाही के दौरान इंडियन आयल की उत्पाद बिक्री 2.22 करोड़ टन रही।

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