स्वास्थ्यकर्मियों ने किया पृथक-वास के नए दिशा-निर्देशों का विरोध, काले रिबन बांध कर किया काम

दरअसल, सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों के पृथक-वास नियमों में बदलाव करते हुए कहा है कि कोविड-19 ड्यूटी के बाद उन्हें तब तक पृथक-वास में भेजने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि उन्हें या तो बहुत ज्यादा खतरा हो या फिर उनमें वायरस संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों।

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नयी दिल्ली, 22 मई स्वास्थ्य कर्मियों के पृथक-वास के नियमों में सरकार द्वारा किए गए बदलावों का विरोध करते हुए केन्द्र एवं शहर के विभिन्न अस्पतालों के डॉक्टर और कर्मी शुक्रवार को हाथ पर काली पट्टी बांध कर काम पर पहुंचे।

दरअसल, सरकार ने स्वास्थ्य कर्मियों के पृथक-वास नियमों में बदलाव करते हुए कहा है कि कोविड-19 ड्यूटी के बाद उन्हें तब तक पृथक-वास में भेजने की आवश्यकता नहीं है, जब तक कि उन्हें या तो बहुत ज्यादा खतरा हो या फिर उनमें वायरस संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों।

सरकार द्वारा उक्त दिशा-निर्देश जारी किए जाने के बाद पिछले कुछ दिन में कई अस्पतालों ने पृथक-वास में विभिन्न होटलों में रह रहे अपने कर्मचारियों से वह जगह खाली करने को कहा है और ऐसा नहीं करने की स्थिति में तय तिथि के बाद से वहां रुकने पर आया खर्च कर्मचारी के वेतन से काट लिया जाएगा।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 15 मई को जारी दिशा-निर्देश के अनुसार, कोविड-19 ड्यूटी पर लगे स्वास्थ्य कर्मियों को पृथक-वास में तभी भेजा जाएगा जब उनके पीपीई के साथ कुछ गड़बड़ी हो गई हो, या फिर वे अत्यधिक खतरे की जद में आ गए हों या फिर उनमें कोरोना वायरस संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों।

लेकिन, कोविड-19 ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने इस नए दिशा-निर्देश का विरोध किया है।

फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (एफओआरडीए) ने कोविड-19 ड्यूटी पर तैनात सभी स्वास्थ्य कर्मियों की जांच और उनके लिए उचित पृथक-वास की मांग करते हुए काला रिबन बांध कर प्रदर्शन करने को कहा है।

एफओआरडीए ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन को पत्र लिखकर दिशा-निर्देश में बदलाव करने की मांग करते हुए कहा है कि वायरस का इंक्यूबेशन समय वायरस के संपर्क में आने के बाद दो से 14 दिन का है और कई ऐसे मामले आए हैं जिनमें डॉक्टर दूसरी या उसके बाद की गई जांचों में कोरोना वायरस से संक्रमित मिले हैं।

एफओआरडीए के अध्यक्ष डॉक्टर शिवाजी देव बर्मन ने कहा, ‘‘मौजूदा हालात में, सहकर्मियों और परिवार के सदस्यों में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जरुरी है कि कोविड-19 ड्यूटी के बाद सभी डॉक्टरों की जांच की जाए और उन्हें कम से कम सात दिन के लिए पृथक-वास में रखा जाए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘अभी तक प्रशासन की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।’’

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