देश की खबरें | ज्ञानवापी मामले में मस्जिद समिति ने न्यायालय से कहा: एएसआई सर्वेक्षण अतीत के घावों को फिर कुरेदेगा

नयी दिल्ली, चार अगस्त मुस्लिम निकाय अंजुमन इंतजामिया मस्जिद समिति ने शुक्रवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई के सर्वेक्षण का इरादा इतिहास खंगालना है और यह "अतीत के घावों को फिर से हरा कर देगा"।

मस्जिद प्रबंधन समिति की ओर से पेश वरिष्ठ वकील हुज़ेफ़ा अहमदी ने मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष दलील दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की यह कवायद "इतिहास को कुरेदने", पूजा स्थल अधिनियम का उल्लंघन करने और भाईचारे और धर्मनिरपेक्षता को प्रभावित करने के लिए की जा रही है।

पीठ ने कहा, "आप एक ही आधार पर हर अंतरिम आदेश का विरोध नहीं कर सकते और आपकी आपत्तियों पर सुनवाई के दौरान फैसला किया जाएगा।" पीठ में न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।

अहमदी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सर्वेक्षण आदेश पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, "एएसआई सर्वेक्षण का इरादा इतिहास खंगालकर यह जानने का है कि 500 साल पहले क्या हुआ था। यह अतीत के घावों को फिर से हरा कर देगा।"

अहमदी ने कहा कि सर्वेक्षण पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का उल्लंघन करता है, जो 1947 में मौजूद धार्मिक स्थानों के चरित्र में बदलाव को निषिद्ध करता है।

शीर्ष अदालत ज्ञानवापी मस्जिद में एएसआई सर्वेक्षण की अनुमति देने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की याचिका पर सुनवाई कर रही है।

उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को ज्ञानवापी समिति की ओर से दायर वह याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें जिला अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी।

जिला अदालत ने एएसआई को यह निर्धारित करने के लिए सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था कि क्या मस्जिद पहले से मौजूद मंदिर पर बनाई गई थी।

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