जरुरी जानकारी | जीएसटी ने कर अनुपालन को सरल बनाया, कर संग्रह बढ़ा, फर्जी आईटीसी सृजन अभी भी चुनौती

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सात साल पहले पेश किए गए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) ने अनुपालन को सरल बनाया, कर संग्रह बढ़ा और राज्यों के राजस्व में वृद्धि हुई।

नयी दिल्ली, 30 जून सात साल पहले पेश किए गए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) ने अनुपालन को सरल बनाया, कर संग्रह बढ़ा और राज्यों के राजस्व में वृद्धि हुई।

विशेषज्ञों ने साथ ही जोड़ा कि फर्जी चालान और धोखे से पंजीकरण की घटनाएं अभी भी करदाताओं के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।

जीएसटी देश में एक जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। इसने 17 करों और 13 उपकरों को पांच स्तरीय संरचना में व्यवस्थित किया, जिससे कर प्रणाली सरल हो गई।

इसके तहत पंजीकरण के लिए कारोबार की सीमा वस्तुओं के लिए 40 लाख रुपये और सेवाओं के लिए 20 लाख रुपये हो गई। वैट के तहत यह सीमा औसतन पांच लाख रुपये से ऊपर थी।

जीएसटी ने राज्यों में 495 अलग-अलग प्रस्तुतियों (चालान, फॉर्म, घोषणाएं आदि) को भी घटाकर सिर्फ 12 कर दिया है। सात वर्षों में पंजीकृत करदाताओं की संख्या 2017 में 65 लाख से बढ़कर 1.46 करोड़ हो गई है।

जीएसटी से औसत मासिक राजस्व 2017-18 में लगभग 90,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में लगभग 1.90 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार जीएसटी ने कर उछाल को 0.72 (जीएसटी से पहले) से बढ़ाकर 1.22 (2018-23) कर दिया है। मुआवजा खत्म होने के बावजूद, राज्यों का कर उछाल 1.15 पर बना हुआ है।

जीएसटी के बिना, वित्त वर्ष 2018-19 से 2023-24 तक राज्यों का राजस्व 37.5 लाख करोड़ रुपये होता। जीएसटी के बाद राज्यों का वास्तविक राजस्व 46.56 लाख करोड़ रुपये था।

वर्ष 2017 से प्रभावी भारित औसत जीएसटी दर में लगातार गिरावट आई है और जीएसटी ने कई आवश्यक वस्तुओं पर करों को जीएसटी से पहले की तुलना में कम कर दिया है।

केश तेल और साबुन जैसी आम वस्तुओं पर कर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया। बिजली के उपकरणों पर कर 31.5 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत कर दिया गया। जीएसटी ने कई आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं को छूट दी है, जैसे बिना ब्रांड वाले खाद्य पदार्थ, कुछ जीवन रक्षक दवाएं, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, सार्वजनिक परिवहन, सैनिटरी नैपकिन, श्रवण यंत्र के पुर्जे, कृषि सेवाएं आदि।

दूसरी ओर कर चोरी करने वाले सरकारी खजाने को चूना लगाने के लिए नए-नए तरीके खोज रहे हैं। कर अधिकारी फर्जी चालान बनाने और फर्जी जीएसटी पंजीकरण की घटनाओं से जूझ रहे हैं।

वर्ष 2023 में जीएसटी खुफिया निदेशालय (डीजीजीआई) ने 1.98 लाख करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का पता लगाया और सरकारी खजाने को चूना लगाने में शामिल 140 साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार किया। ऑनलाइन गेमिंग, कैसीनो, बीमा और सेकंडमेंट (मानवशक्ति सेवाओं का आयात) जैसे विविध क्षेत्रों में महत्वपूर्ण जीएसटी चोरी का पता चला।

जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना से उद्योग के लिए विवाद समाधान प्रक्रिया आसान और तेज होने की उम्मीद है।

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) के अध्यक्ष रंजीत कुमार अग्रवाल ने कहा, ''विभिन्न सरकारी विभागों में 6,800 से अधिक अधिकारियों को प्रशिक्षित करने सहित क्षमता निर्माण में हमारे प्रयास एक कुशल और पारदर्शी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रहे हैं।''

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