हरित आवरण नष्ट हो जाने से कोलकाता में प्रदूषण का स्तर बढ़ा: पर्यावरणविद्
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने कहा कि 5,000 से अधिक पेड़ उखड़ गए हैं, जिनमें से कई पेड़ 50 साल से भी अधिक पुराने थे। हालांकि पर्यावरणविदों का कहना है कि चक्रवात के कारण 10,000 से अधिक पेड़ टूटे हैं।
कोलकाता (पश्चिम बंगाल), 24 मई अत्यंत भीषण चक्रवात ‘अम्फान’ के कारण कोलकाता में हजारों पेड़ उखड़ जाने से शहर में प्रदूषण स्तर बढ़ सकता है। पर्यावरणविदों ने यह आशंका जताई है।
कोलकाता नगर निगम (केएमसी) ने कहा कि 5,000 से अधिक पेड़ उखड़ गए हैं, जिनमें से कई पेड़ 50 साल से भी अधिक पुराने थे। हालांकि पर्यावरणविदों का कहना है कि चक्रवात के कारण 10,000 से अधिक पेड़ टूटे हैं।
कार्बन उत्सर्जन को अवशोषित करने वाले इन पेड़ों ने लॉकडाउन में शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाई थी।
पर्यावरणविद सुमेंद्र नाथ घोष ने कहा, ‘‘शहर में सड़क किनारे लगे एक तिहाई से अधिक पेड़ नष्ट हो गए प्रतीत होते हैं। हमें सितंबर के पहले सप्ताह से पीएम 2.5 के स्तर में गंभीर बढ़ोतरी की आशंका है, जब लॉकडाउन के बाद सड़कों पर करीब आठ लाख वाहन चलेंगे।’’
पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि आगामी मानसून सत्र में बड़ी संख्या में पेड़ लगाने होंगे।
केएमसी के प्रशासकों के बोर्ड के सदस्य देबाशीष कुमार ने कहा, ‘‘हम हालात सामान्य हो जाने के बाद वृक्षारोपण मुहिम आरंभ करेंगे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी हरित आवरण को बहाल करने के लिए पेड़ लगाने की अपील की है।’’
उन्होंने कहा कि लेकिन इसके लिए पहले उखड़ चुके पेड़ों को तत्काल हटाना होगा और यह काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘एक पूर्ण विकसित पेड़ के स्थान पर 10 पेड़ों को लगाना होगा। यह मानक प्रक्रिया है।’’
भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण के वैज्ञानिक शिव कुमार ने बताया कि इस चक्रवात ने हावड़ा के शिवपुर में आचार्य जगदीश चंद्र बोस भारतीय वनस्पति उद्यान में विश्व के सबसे बड़े बरगद के पेड़ को भी नष्ट कर दिया है।
उद्यान के एक अधिकारी ने बताया कि वनस्पति उद्यान में कई अन्य पेड़ टूट गए हैं।
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