देश की खबरें | सरकारी निकायों, विशेषज्ञों को जोशीमठ के हालात पर बिना अनुमति मीडिया से बात नहीं करने को कहा गया

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नयी दिल्ली, 14 जनवरी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और उत्तराखंड सरकार ने एक दर्जन से अधिक सरकारी संगठनों और संस्थानों तथा उनके विशेषज्ञों से जोशीमठ की स्थिति पर कोई अनधिकृत टिप्पणी या बयान नहीं देने को कहा है।

एनडीएमए ने इन संगठनों और संस्थानों के प्रमुखों को भेजे अपने पत्र में कहा है कि उनसे जुड़े लोगों को उत्तराखंड के जोशीमठ में जमीन धंसने के संबंध में मीडिया से बातचीत नहीं करनी चाहिए और सोशल मीडिया पर इससे संबंधित आंकड़े साझा नहीं करने चाहिए।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इस परामर्श का मकसद मीडिया को जानकारी देने से इंकार करना नहीं, बल्कि भ्रम से बचना है क्योंकि इस प्रक्रिया में बहुत सारे संस्थान शामिल हैं और वे स्थिति के मद्देनजर अपनी-अपनी व्याख्या दे रहे हैं।

एनडीएमए ने कहा कि यह देखा गया है कि विभिन्न सरकारी संस्थान इस विषय से संबंधित आंकड़े सोशल मीडिया मंचों पर जारी कर रहे हैं और साथ ही वे मीडिया के साथ बातचीत में जोशीमठ की स्थिति की अपनी तरह से व्याख्या कर रहे हैं।

इसने कहा कि जोशीमठ पर बयान न केवल प्रभावित निवासियों, बल्कि देश के नागरिकों के बीच भी भ्रम पैदा कर रहे हैं।

एनडीएमए ने कहा कि 12 जनवरी को केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई एक बैठक के दौरान यह मुद्दा उठा और बाद में उसी दिन एनडीएमए की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में भी इस पर चर्चा की गई।

एनडीएमए ने कहा कि जोशीमठ में जमीन धंसने के आकलन के लिए एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया गया है।

एनडीएमए ने संगठनों से अपने विशेषज्ञों को मामले के बारे में संवेदनशील बनाने के लिए कहा। साथ ही कहा कि संगठनों और विशेषज्ञों को एनडीएमए द्वारा गठित विशेषज्ञ समूह की अंतिम रिपोर्ट जारी होने तक मीडिया मंचों पर कुछ भी साझा करने से बचना चाहिए।

इसी तरह के पत्र में, उत्तराखंड सरकार ने संगठनों से कहा है कि कुछ संस्थान और एजेंसियां ​​सक्षम प्राधिकारियों से उचित अनुमति के बिना जोशीमठ के बारे में जानकारी या रिपोर्ट प्रकाशित और साझा कर रहे हैं।

इसने कहा कि यह जमीनी हालात पर प्रतिकूल प्रभाव डालने के साथ-साथ निवासियों में डर पैदा कर रहा है।

पत्र में कहा गया है कि संगठनों को ऐसी किसी भी रिपोर्ट या जानकारी को प्रकाशित या सोशल मीडिया पर साझा करने से पहले संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों या उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से पूर्वानुमति लेनी चाहिए।

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