तिरुवनंतपुरम, 25 अक्टूबर केरल के राज्यपाल और राज्य में विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खान ने मंगलवार को श्रीनारायणगुरु मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि उनकी नियुक्ति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों का कथित उल्लंघन होने के बाद उन्हें पद पर बने रहना का क्या कानूनी अधिकार है।
खान ने पिछले सप्ताह केरल के नौ अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से अपने पद से इस्तीफा देने को कहा था।
जब कुलपतियों ने सोमवार पूर्वाह्न 11:30 बजे तक अपने इस्तीफे नहीं भेजे तो खान ने उन्हें कारण बताओ नोटिस भेजकर तीन नवंबर तक जवाब मांगे हैं कि उच्चतम न्यायालय के 21 अक्टूबर के आदेश के बाद उनका अपने पदों पर बने रहने का क्या कानूनी अधिकार है।
इसी तरह का एक नोटिस श्रीनारायणगुरु मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पी एम मुबारक पाशा को भेजकर चार नंबवर तक उनसे जवाब मांगा गया है।
नोटिस में कहा गया है कि शीर्ष अदालत के फैसले के मद्देनजर प्रथम दृष्टया पाया गया कि ‘‘आपकी नियुक्ति यूजीसी के नियमों के विपरीत है और कानून सम्मत नहीं है।’’
शीर्ष अदालत ने 21 अक्टूबर को एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को रद्द करते हुए कहा था कि यूजीसी के अनुसार राज्य द्वारा गठित समिति को कुलपति को कम से कम तीन ऐसे लोगों के नाम की सिफारिश करनी चाहिए जिनमें इंजीनियरिंग विज्ञान के क्षेत्र के प्रतिष्ठित लोग भी हों, लेकिन उसने केवल एक नाम भेजा।
इस आदेश के आधार पर खान ने कुलपतियों के इस्तीफे मांगे थे जिनके नाम नियुक्ति के लिए अकेले भेजे गये थे।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY