ताजा खबरें | मछुआरों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है सरकार : जयशंकर

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि सरकार भारतीय मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और मछुआरों पर कथित हमलों की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राजनयिक माध्यमों से श्रीलंका की सरकार के समक्ष उठाया जाता है।

नयी दिल्ली, 22 जुलाई विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि सरकार भारतीय मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और मछुआरों पर कथित हमलों की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राजनयिक माध्यमों से श्रीलंका की सरकार के समक्ष उठाया जाता है।

लोकसभा में के नवासखनी के प्रश्न के लिखित उत्तर में विदेश मंत्री जयशंकर ने यह बात कही। सदस्य ने पूछा था कि क्या सरकार ने हाल में श्रीलंका के तटरक्षक बलों द्वारा तमिलनाडु के मछुआरों पर बार-बार किये गए हमलों का संज्ञान लिया है और तीन वर्षों में ऐसी घटनाओं का ब्यौरा क्या है।

इस पर विदेश मंत्री ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान कई बार ऐसा हुआ है कि गिरफ्तार किये गए भारतीय मछुआरों ने श्रीलंका के कर्मियों द्वारा मारपीट किये जाने की शिकायत की।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार भारतीय मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है और मछुआरों पर कथित हमलों की रिपोर्ट प्राप्त होने पर राजनयिक माध्यमों से वहां की सरकार के समक्ष उठाया जाता है।’’

विदेश मंत्री ने कहा कि भारतीय मछुआरों से संबंधित मुद्दों को उच्चतम स्तरों पर उठाया जाता है जिसमें सितंबर 2020 में डिजिटल माध्यम से आयोजित द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन के दौरान हमारे प्रधानमंत्री की श्रीलंका के तत्कालीन प्रधानमंत्री के साथ हुई बैठक शामिल है।

जयशंकर ने कहा, ‘‘मैंने 2021 में 5-7 जनवरी को अपनी कोलंबो यात्रा के दौरान श्रीलंका के मत्स्य पालन मंत्री से मुलाकात की थी और भारतीय मछुआरों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा की थी। ’’

उन्होंने कहा कि तत्कालीन विदेश सचिव द्वारा 2-5 अक्टूबर 2021 को श्रीलंका की यात्रा के दौरान इस मुद्दे को उठाया गया था। जयशंकर ने कहा कि श्रीलंका के समक्ष यह दोहराया गया था कि मछुआरों से संबंधित मुद्दों पर मानवीय ढंग से कदम उठाने की जरूरत है।

विदेश मंत्री ने कहा कि इस बात पर भी जोर दिया गया था कि दोनों सरकारों के बीच मौजूदा सहमति का सख्ती से पालन किया जाए और दोनों पक्ष यह सुनिश्चित करें कि किसी भी परिस्थिति में बल प्रयोग न हो।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा जनवरी एवं मार्च 2022 में भी श्रीलंका के समक्ष इस विषय को उठाया गया था।

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