देश की खबरें | गोदरेज अपार्टमेन्ट्स: न्यायालय ने पर्यावरण मंजूरी रद्द करने का हरित अधिकरण का आदेश निरस्त किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बेंगलुरू में गॉदरेज प्रापर्टीज लि और वंडर प्रोजेक्ट्स डेवलपमेन्ट प्रा लि की बहुमंजिली लक्जरी परियोजना की पर्यावरण मंजूरी रद्द करने का राष्ट्रीय हरित अधिकरण का आदेश मंगलवार को निरस्त कर दिया।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 11 अगस्त उच्चतम न्यायालय ने बेंगलुरू में गॉदरेज प्रापर्टीज लि और वंडर प्रोजेक्ट्स डेवलपमेन्ट प्रा लि की बहुमंजिली लक्जरी परियोजना की पर्यावरण मंजूरी रद्द करने का राष्ट्रीय हरित अधिकरण का आदेश मंगलवार को निरस्त कर दिया।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने हरित अधिकरण को सारे मामले पर पुन: विचार करने का आदेश दिया और कहा कि इस दौरान यहां पर कोई निर्माण कार्य नहीं होगा।

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हरित अधिकरण ने अपने फैसले में व्यवस्था दी थी कि यह निर्माण कायकोण्ड्राहल्ली झील के बफर जोन के दायरे में आयेगा, इसलिए यह जोन नियमों का उल्लंघन करती है।

अधिकरण ने कहा था कि झील के बफर जोन का उल्लंघन करने वाले किसी भी निर्माण कार्य को पर्यावरण मंजूरी नही दी जा सकती है।

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अधिकरण के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर शीर्ष अदालत ने मंगलवार को कहा कि यह स्पष्ट किया जाता है कि किन परिस्थितियों में तीन फरवरी, 2020 का आदेश निरस्त किया जाता है, पर्यावरण मंजूरी की वैधता अधिकरण द्वारा लिये जाने वाले फैसले के दायरे में रहेगी और इस समय पर्यावरण मंजूरी बहाल नहीं मानी जायेगी।

न्यायालय ने कहा कि उसने इस मामले के गुण दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और सभी दलीलें उपलब्ध हैं।

न्यायालय ने अधिकरण से कहा कि उसके समक्ष इस मामले में पक्षकारों की पहली हाजरी से छह सप्ताह के भीतर इन अपीलों पर पुनर्विचार करके इनका निस्तारण किया जाये।

शीर्ष अदालत ने कहा कि अधिकरण ने जिस तारीख को यह आदेश दिया था, उस समय तक निरीक्षण का अंतिम दौर पूरा नहीं हुआ था और अधिकरण को किसी निष्कर्ष पर पहुंचते समय संयुक्त समिति की अंतिम रिपोर्ट के अवलोकन का लाभ नही मिला था।

हरित अधिकरण ने इस परियोजना के खिलाफ बेंगलुरू निवासी एम पी राजन्ना की याचिका पर अपना आदेश सुनाया था। उन्होंने इस परियोजना के लिये पर्यावरण मंजूरी देने के राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण के 10 जनवरी, 2018 के आदेश को चुनौती दी थी।

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