देश की खबरें | तीसरे ध्रुव में हिमनद झील के कारण दो लाख लोगों की जान, बुनियादी ढांचे को खतरा: अध्ययन
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नयी दिल्ली, 16 दिसंबर तिब्बती पठार, आसपास के हिमालय, हिंदू कुश और तियानशान पर्वत श्रृंखलाओं तक फैले तीसरे ध्रुव में हिमनद झील में अचानक आने वाली बाढ़ (जीएलओएफ) से लगभग दो लाख लोगों की जान खतरे में है। एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है।
चीन की विज्ञान अकादमी के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण ये संभावित जीएलओएफ इमारतों, जलविद्युत परियोजनाओं, सड़कों और पुलों सहित क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को भी खतरे में डालते हैं। क्षेत्र की 5,535 हिमनद झीलों में से उन्होंने लगभग 1,500 की पहचान की है जिनमें बाढ़ की ‘‘ज्यादा आशंका’’ है।
शोधकर्ताओं ने 1900 से आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद, यह भी पाया कि वार्षिक जीएलओएफ घटनाओं की आवृत्ति 1981-1990 के दौरान 1.5 घटनाओं के औसत से 2011-2020 के दौरान 2.7 तक बढ़ गई।
शोधकर्ताओं ने ‘नेचर कम्युनिकेशंस’ जर्नल में प्रकाशित अपने अध्ययन में कहा कि कुल मिलाकर, ये निष्कर्ष भारत, चीन, कजाकिस्तान, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए चिंताजनक हैं, जो तीसरे ध्रुव में जीएलओएफ से जोखिम में हैं।
अध्ययन के लेखक और चीनी विज्ञान अकादमी में एसोसिएट प्रोफेसर वेइकाई वांग ने कहा, ‘‘लगभग 55,808 इमारतें, 105 मौजूदा या नियोजित जलविद्युत परियोजनाएं, 194 वर्ग किलोमीटर खेत, 5,005 किलोमीटर सड़कें और 4,038 पुलों को संभावित जीएलओएफ से खतरा है।’’
वांग ने कहा, ‘‘हमारे निष्कर्ष इन आर्थिक रूप से वंचित और अत्यधिक संवेदनशील क्षेत्रों में संभावित आपदाओं से उत्पन्न महत्वपूर्ण चुनौतियों को रेखांकित करते हैं।’’
माना जाता है कि बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा पैटर्न में बदलाव के कारण पिछले तीन दशकों में तीसरे ध्रुव के 10,000 से अधिक हिमखंड पीछे हट गए हैं, जिससे हजारों हिमनद झील बन गई हैं।
हिमनद का खंड टूटने, हिमस्खलन, भूस्खलन, या प्राकृतिक बांधों के टूटने जैसी घटनाओं की वजह से हिमनद झीलें तेजी से बड़ी मात्रा में पानी छोड़ सकती हैं, जिससे विनाशकारी विस्फोट या जीएलओएफ हो सकता है।
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