विदेश की खबरें | जर्मनी: सर्वेक्षण में धुर दक्षिणपंथी पार्टी को बढ़ते समर्थन से मुख्यधारा के राजनीतिक दल सतर्क
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सार्वजनिक प्रसारणकर्ता एआरडी के लिए किया गया ‘द ड्यूशलैंडट्रेंड’ मासिक सर्वेक्षण बृहस्पतिवार को जारी किया। इसमें आल्टरनेटिव फॉर जर्मनी को 18 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया है, जो चांसलर ओलाफ शोल्ज की पार्टी सोशल डेमोक्रेट के बराबर है।
सार्वजनिक प्रसारणकर्ता एआरडी के लिए किया गया ‘द ड्यूशलैंडट्रेंड’ मासिक सर्वेक्षण बृहस्पतिवार को जारी किया। इसमें आल्टरनेटिव फॉर जर्मनी को 18 प्रतिशत लोगों का समर्थन मिलने का दावा किया गया है, जो चांसलर ओलाफ शोल्ज की पार्टी सोशल डेमोक्रेट के बराबर है।
उल्लेखनीय है कि 2021 के चुनाव में, शोल्ज की पार्टी को 25.7 प्रतिशत, जबकि आल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) को 10.3 प्रतिशत वोट मिले थे।
मुख्य विपक्षी दल क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स के वरिष्ठ सांसद नोरबर्ट रोइटजेन ने कहा, ‘‘...यह एक त्रासदी है और सभी लोकतांत्रिक दलों को इसे एक खतरे की घंटी के तौर पर देखना चाहिए।’’
सर्वेक्षण 30-31 मई को किया गया, जिसमें 1,302 लोगों को शामिल किया गया था। सर्वेक्षण में मुख्य विपक्षी दल क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स को 29 प्रतिशत वोट मिले।
रोइटजेन ने कहा कि उनकी पार्टी को खुद से यह सवाल पूछना चाहिए कि सरकार के प्रति मतदाताओं की नाराजगी का लाभ उसे क्यों नहीं मिला।
उनकी पार्टी की सांसद सेरप गुलेर ने कहा कि एएफडी के लिए मजबूत समर्थन के बाद अब सभी लोकतांत्रिक दलों को सतर्क हो जाना चाहिए। उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा, ‘‘हमें इसे शीघ्र बदलने की जिम्मेदारी उठानी होगी।’’
उल्लेखनीय है कि शोल्ज के तीन दलों के गठबंधन को उच्च आव्रजन और देश में घरों को गर्म रखने वाली लाखों प्रणालियों को बदलने की योजना को लेकर विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है।
रूसी आक्रमण के खिलाफ यूक्रेन की रक्षा के लिए जर्मनी के सैन्य सहयोग को भी जर्मन नागरिकों के एक वर्ग ने खारिज कर दिया है, जबकि इस कदम को ज्यादातर लोगों का समर्थन प्राप्त हुआ है।
चरमपंथियों से संबंध रखने को लेकर एएफडी और इससे संबद्ध संगठन देश की खुफिया एजेंसी की निगरानी के दायरे में है।
एजेंसी के प्रमुख ने मौजूदा स्थिति और 1920 एवं 1930 के दशक में देखे गये राजनीतिक अतिवाद के बीच समानताएं होने को लेकर आगाह किया है। उल्लेखनीय है कि यह राजनीतिक अतिवाद उस समय निरंकुशतावाद और नाजी तानाशाही में तब्दील हो गया था।
सर्वेक्षण में, एएफडी का समर्थन करने वाले करीब दो-तिहाई लोगों ने कहा कि उन्होंने अन्य दलों के विरोध में ऐसा किया, ना कि इसलिए कि वे धुर-दक्षिणपंथी नीतियों से सहमत हैं।
एपी
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)