देश की खबरें | जर्मन उद्योग दौड़ में अच्छी स्थिति में : भारत की पनडुब्बी परियोजना पर बोले पिस्टोरियस
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नयी दिल्ली, छह जून जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने मंगलवार को कहा कि भारत के आसपास अस्थिरता की भावना को देखते हुए जर्मनी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ साझेदारी में और अधिक योगदान कर सकता है और उसे करना भी चाहिए।
उनका यह बयान क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य प्रभाव को लेकर वैश्चिक चिंताओं के बीच आया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अपनी व्यापक बातचीत के बाद, पिस्टोरियस ने कहा कि भारत की छह पनडुब्बियों की प्रस्तावित खरीद से संबंधित प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है और अनुबंध की दौड़ में जर्मन उद्योग “अच्छी स्थिति” में हैं।
अधिकारियों ने कहा कि करीब 43,000 करोड़ रुपये की लागत से छह स्टेल्थ पारंपरिक पनडुब्बियां खरीदने की भारत की योजना पर चर्चा हुई और पिस्टोरियस ने इस परियोजना में जर्मनी की रुचि दिखाई।
अनुबंध के दावेदारों में से एक जर्मनी की थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (टीकेएमएस) है।
सौदे के बारे में पूछे जाने पर पिस्टोरियस ने संवाददाताओं को बताया, “प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन मुझे लगता है कि इस दौड़ में जर्मन उद्योग अच्छी जगह पर हैं।”
रक्षा मंत्रालय ने जून 2021 में भारतीय नौसेना के लिए छह पारंपरिक पनडुब्बियों को घरेलू स्तर पर बनाने की बड़ी परियोजना को मंजूरी दे दी थी।
पनडुब्बियों को बहुचर्चित रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत बनाया जाएगा, जो घरेलू रक्षा निर्माताओं को आयात निर्भरता को कम करने के लिए उच्च क्षमता वाले सैन्य मंचों का उत्पादन करने के लिए प्रमुख विदेशी रक्षा कंपनियों के साथ हाथ मिलाने की अनुमति देता है।
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