नयी दिल्ली, पांच अगस्त अगले महीने यहां होने वाले जी-20 सम्मेलन से पहले लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) तथा दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को शहर में भारी वर्षा की स्थिति में संभावित जलभराव से निपटने के लिए आकस्मिक योजना तैयार करने का निर्देश दिया गया है। उपराज्यपाल कार्यालय ने शनिवार को एक बयान में यह जानकारी दी।
प्रगति मैदान में आगामी जी-20 सम्मेलन के आयोजन स्थल के आसपास के स्थानों समेत दिल्ली के कई हिस्से पिछले महीने वर्षा होने और यमुना नदी में बाढ़ जाने के कारण जलमग्न हो गए थे।
भारत की अध्यक्षता में जी-20 सम्मेलन नौ और 10 सितंबर को होगा।
पीडब्ल्यूडी, एमसीडी, नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद, दिल्ली विकास प्राधिकरण, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, पर्यावरण एवं वन विभाग, समेत विभिन्न संबंधित एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपराज्यपाल वी के सक्सेना ने जी-20 सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा की।
दीवारों, खंभों, मेट्रो के खंभों को वाणिज्यिक एवं राजनीतिक संगठनों द्वारा विरूपित किए जाने की ‘निरंतर समस्या’ का विषय भी इस बैठक में उठाया गया।
बयान के अनुसार, जिला निगरानी समन्वयकों को इस मामले से सख्ती से निपटने का निर्देश दिया गया।
महिपालपुर में रेडिसन ब्लू, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में सूर्या होटल, नेहरू प्लेस में इरोज होटल तथा होटल ललित और हयात रिजेंसी जैसे कुछ होटलों के आसपास के क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण का भी मुद्दा बैठक में उठा।
बयान के अनुसार, इन होटलों के आसपास के क्षेत्रों को मिशन मोड में सजाने का स्पष्ट निर्देश दिया गया।
उपराज्यपाल कार्यालय से जारी बयान में कहा गया, ‘‘दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की 20 सचल टीम जी-20 कार्यक्रमों के समापन तक निरंतर सड़कों पर होंगी तथा टीम के समक्ष किसी भी उल्लंघन के सामने आने पर मौके पर ही दंडित किया जाएगा।’’
बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने कहा कि 11 जुलाई से उनके नियमित निरीक्षण के बाद से उन्हें ‘‘सुधार नजर आया है।’’
बयान के मुताबिक, जी-20 बैठक से संबंधित कार्य निर्धारित कार्यक्रम के हिसाब से हो रहे हैं तथा बड़े लंबित कार्यों में 61 सड़कों से मलबे को हटाना तथा फुटपाथ सुधार कार्य शामिल है।
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