चतरा के पुलिस अधीक्षक ऋषभ झा ने बताया कि उग्रवादी कमांडर उदेश गंझू ने पुलिस और सीआरपीएफ की 190 बटालियन के कमांडेंट पवन बासन समेत अन्य अधिकारियों के समक्ष आज हथियार डाला।
पुलिस अधीक्षक समेत अन्य अधिकारियों ने नक्सलवाद व अपराध का रास्ता छोड़ मुख्य धारा में शामिल हो रहे गंझू का स्वागत किया। साथ ही सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत सब जोनल कमांडर पर राज्य सरकार द्वारा घोषित इनाम की राशि पांच लाख रुपये का चेक भी उसे सौंपा।
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आत्मसमर्पण के बाद पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मुख्यधारा में शामिल हो रहे गंझू के बच्चों की शिक्षा समेत अन्य सरकारी नीति के तहत योजनाओं का लाभ जल्द से जल्द उसके परिजनों को दिया जाएगा।
उदेश गंझू ने कहा की नक्सली अब अपने उद्देश्य से भटक चुके हैं। बहला-फुसलाकर अपने संगठन में युवाओं को शामिल करा लेते हैं लेकिन बाद में संगठन का झंडा ढोने वाले नक्सलियों की जिंदगी बद से बदतर हो जाती है। या तो वह पुलिस की गोलियों के शिकार हो जाते हैं या फिर दर-दर भटकने को विवश रहते हैं।
आत्मसमर्पण करने के बाद गंझू ने अन्य नक्सलियों से भी सरकार की समर्पण नीति का लाभ उठाते हुए मुख्य धारा में शामिल होने की अपील की।
लावालौंग थाना क्षेत्र के सीलदाग गांव निवासी टीएसपीसी सब जोनल कमांडर उदेश गंझु विगत 15 वर्षों से संगठन में सक्रिय था। इस दौरान उसने अपने कार्यक्षेत्र चतरा, लातेहार व पलामू जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में अपने दस्ते के साथ एक दर्जन से अधिक दुर्दांत नक्सली वारदात को अंजाम दिया था। उसके खिलाफ तीनों जिले में आठ नक्सली मामले दर्ज है, जबकि अन्य जिलों में दर्ज मामलों की पड़ताल पुलिस कर रही है।
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