देश की खबरें | आंध्र प्रदेश में फर्जी डिजिटल हस्ताक्षर करने के आरोप में पांच गिरफ्तार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. आंध्र प्रदेश सीआईडी ने कथित तौर पर गैर कानूनी से पैसे कमाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में तैनात अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर फर्जी मुख्यमंत्री याचिकाएं (सीएमपी) तैयार करने और विभिन्न विभागों में भेजने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

अमरावती, 12 अगस्त आंध्र प्रदेश सीआईडी ने कथित तौर पर गैर कानूनी से पैसे कमाने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में तैनात अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर फर्जी मुख्यमंत्री याचिकाएं (सीएमपी) तैयार करने और विभिन्न विभागों में भेजने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस ने शनिवार को बताया कि सीआईडी ने कनरामारला श्रीनु, गुट्टहुला सीतारमैय्या, नलाजला साई राम, भुक्या चैतन्या नाइक और अब्दुल रज्जाक को हिरासत में लिया।

सीआईडी अधिकारी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया, ‘‘गत कुछ समय से सीएमपी बनाने के लिए सीएमओ अधिकारियों के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल किया जाता था। सीएमओ अधिकारियों की शिकायत के आधार पर हमने प्राथमिकी दर्ज की।

उन्होंने बताया कि संयोग से आरोपी सीएमओ सचिवालय के ई ऑफिस लॉगइन यूजरनेम और पासबोर्ड का इस्तेमाल विधायकों और सांसदों के अनुरोध के जरिये सीएमपी बनाने के लिए करते थे और इसके लिए वे संबंधित अधिकारी की मंजूरी नहीं लेते थे। उन्होंने बताया कि इन सीएमपी को विभिन्न विभागों को लागू करने के लिए भेजा जाता था।

पुलिस ने श्रीनु को मामले में मुख्य आरोपी माना है और जो अधिकारी रेवु मुथयला राजू के कार्यालय में कनिष्ठ कर्मी के तौर काम करता है।

विज्ञप्ति के मुताबिक तैनाती के दौरान श्रीनु ने ई ऑफिस के इस्तेमाल की जानकारी प्राप्त की। वह शुरुआत में फर्जी सीएमपी तैयार कर और अपनी इच्छानुसार किसी विभाग में भेज कर आर्थिक लाभ प्राप्त करता था।

इसके बाद उसने विभिन्न अधिकारियों के अधीन काम करने वाले साई राम, सीतामैय्या, नाइक और रज्जाक के साथ मिलकर गिरोह बनाया और विधायकों या सांसदों के लेटर पैड के साथ याचिका लेता और उन्हें ई- ऑफिस पर अपलोड कर याचिकाकर्ताओं से 30 से 50 हजार रुपये की वसूली करता।

पुलिस ने जांच के दौरान 66 सीएमपी को फर्जी पाया जिसके बाद वैज्ञानिक जांच की गई जिसमें पता चला कि आरोपी वसूली से मिली राशि आपस में बांटते थे।

पुलिस ने बताया कि मामले में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा- 420, 465, 471 और 120बी, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा- 66सी और डी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की कार्यवाही की जा रही है।

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