देश की खबरें | जम्मू कश्मीर के विलय से जुड़ी फाइलें : बूचर पेपर का खुलासा राष्ट्र हित में--सीआईसी ने कहा

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नयी दिल्ली, 10 अक्टूबर केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने एक आदेश में कहा है कि 1947-49 की अवधि से जुड़े जम्मू कश्मीर के बारे में भारत के तत्कालीन द्वितीय सेना प्रमुख जनरल सर रॉय बूचर द्वारा नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी (एनएमएमएल) को उपलब्ध कराई गई फाइलों के खुलासे से विलय पर प्रकाश पड़ सकता है, जो कि राष्ट्र हित में है।

सूचना आयुक्त उदय महूरकर ने एनएमएमएल के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) को इस विषय को उच्च अधिकारियों के पास ले जाने को कहा और आरटीआई कार्यकर्ता वेंकटेश नायक को सूचना साझा करने से पहले आवश्यक अनुमति लेने को कहा।

सूचना का अधिकार (आरटीआई) से जुड़े विषयों पर निर्णय करने वाले सर्वोच्च प्राधिकार सीआईसी ने हालांकि यह नहीं बताया कि यदि उच्च अधिकारी आपत्ति जताते हैं तो क्या सूचना का खुलासा किया जा सकता है।

नायक ने आरटीआई कानून के तहत एनएमएमएल से दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी लेकिन उसने आरटीआई कानून के किसी प्रावधान का हवाला देते हुए उन्हें इसे देने से मना कर दिया था।

महूरकर ने अपने आदेश में कहा, ‘‘मामले के तथ्यों को ध्यान में रखते हुए और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए, आयोग का कहना है कि आवेदक का उद्देश्य राष्ट्र हित में है। इसलिए आयोग सीपीआईओ को विषय को प्रतिवादी प्राधिकार के उच्च अधिकारियों के पास ले जाने और आयोग के इस आदेश का उल्लेख करने तथा आवेदक को सूचना साझा करने से पहले आवश्यक अनुमति लेने का निर्देश देता है।’’

महूरकर ने अपने आदेश में कहा, ‘‘उन्होंने (नायक ने) कहा कि तत्कालीन द्वितीय सेना प्रमुख ने ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्ससेशन’ (विलय पत्र) के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी निभाई थी और उनसे जुड़े कुछ दस्तावेजों का खुलासा लोगों को अब तक नहीं किया गया है, जो विलय की सच्चाई पर प्रकाश डाल सकता है।’’

जनरल सर फ्रांसिस रॉबर्ट रॉय बूचर ने एक जनवरी 1948 से 15 जनवरी 1949 तक तक भारतीय थल सेना के द्वितीय प्रमुख के रूप में सेवा दी थी।

नायक ने कहा कि एनएमएमएल ने विदेश मंत्रालय के निर्देश पर 70 साल बाद भी इन दस्तावेजों को लोगों की पहुंच से दूर रखा है।

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