जरुरी जानकारी | कश्मीर के भदरवाह में लाल रंग का पीयर्स उगाकर सफलता की नई कहानी लिख रहे किसान
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. जम्मू-कश्मीर के भदरवाह के भारोवा, खालो और शनात्रा गांव जो किसी समय बार-बार सूखा पड़ने के कारण गरीबी की मार झेल रहे थे, वहां के किसानों ने बागबानी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। यहां किसान इतालवी पीयर्स (लाल रंग का फल) की खेती करते हैं जिसका सालाना उत्पादन करीब 1.5 मीट्रिक टन है।
भदरवाह (जम्मू-कश्मीर), तीन जुलाई जम्मू-कश्मीर के भदरवाह के भारोवा, खालो और शनात्रा गांव जो किसी समय बार-बार सूखा पड़ने के कारण गरीबी की मार झेल रहे थे, वहां के किसानों ने बागबानी क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। यहां किसान इतालवी पीयर्स (लाल रंग का फल) की खेती करते हैं जिसका सालाना उत्पादन करीब 1.5 मीट्रिक टन है।
इन इलाकों में बागबानी या फल उगाना किसानों के लिए आजीविका के एक अच्छे विकल्प के रूप में उभरा है। जबकि चेनाब घाटी क्षेत्र के अन्य इलाकों में किसान फलों के बजाए मुख्य रूप से मक्का, धान जैसी फसल उगाने पर ज्यादा ध्यान देते हैं।
इसकी शुरुआत करीब दो दशक पहले हुई थी जब भरोवा गांव के हाजी मोहम्मद शफी शेख ने मक्का के बजाए अपनी पांच एकड़ भूमि में बागबानी करने का फैसला किया। उन्होंने बताया, ‘‘मैंने 2002 में परंपरागत मक्का बुवाई के बजाए बागबानी करना शुरू किया। शुरू के चार साल बड़ी कठिनाईयां आईं लेकिन धीरे-धीरे आय साल के 20,000 रुपये से बढ़कर 25 लाख रुपये प्रतिवर्ष हो गई।’’
वे अपने बाग में इतालवी पीयर्स उगाते हैं, इसके 200 पेड़ उनके बाग में है और गांव के 25 लोगों को उन्होंने रोजगार भी दिया है। उनकी सफलता से अन्य किसान भी प्रेरित हुए हैं।
आज भारोवा, खालो और शानातारा गांवों के 165 परिवार फल विशेषकर इतालवी पीयर्स उगा रहे हैं और क्षेत्र में इस विदेशी फल के अग्रणी उत्पादक हैं।
शेख के बेटे अत्ता मोहम्मद कहते हैं, ‘‘आज हमारा पूरा इलाका फल उत्पादन का केंद्र बन गया है।’’
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