देश की खबरें | किसानों ने कभी सड़कों को अवरुद्ध नहीं किया: किसान संघ के नेताओं ने दावा किया

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नयी दिल्ली, 29 अक्टूबर दिल्ली पुलिस द्वारा किसानों के दो आंदोलन स्थलों टीकरी और गाजीपुर पर अवरोधक (बैरिकेड्स) का बड़ा हिस्सा हटाने के बीच किसान संघ के नेताओं ने शुक्रवार को दावा किया कि यह कदम उनके इस रुख को दर्शाता है कि उन्होंने शहर के सीमा बिंदुओं पर सड़कों को कभी भी अवरुद्ध नहीं किया।

पिछले साल लोहे और सीमेंट के बैरिकेड्स की कई परतें और तारों की कम से कम पांच परतें लगाई गई थीं। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों के विरोध के दौरान दिल्ली में 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद व्यवस्थाओं को और पुख्ता कर दिया गया था।

दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार की शाम को दिल्ली-रोहतक राजमार्ग पर टीकरी बॉर्डर पर विरोध स्थल पर लगाए गए बैरिकेड्स और कंटीले तारों को हटाना शुरू कर दिया था। इसी तरह की कार्रवाई शुक्रवार सुबह दिल्ली-उत्तर प्रदेश सीमा पर गाजीपुर में शुरू की गई।

किसान संघ के नेताओं ने कहा कि यह कदम उनके इस रुख की पुष्टि करता है कि उन्होंने शहर के सीमा क्षेत्रों पर सड़कों को कभी भी अवरुद्ध नहीं किया।

किसान नेताओं ने कहा कि आंदोलन स्थलों पर दोनों मार्गों को पूरी तरह से खाली करने का कोई भी निर्णय संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) द्वारा लिया जाएगा, एसकेएम केंद्र के कृषि कानूनों का विरोध करने वाले 40 से अधिक किसान संघों का एक निकाय है।

हालांकि, उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में यातायात के लिए रास्ता बनाया जाएगा।

दिल्ली पुलिस का फैसला उच्चतम न्यायालय की सुनवाई के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें किसान संघों ने दावा किया था कि शहर की सीमाओं पर नाकेबंदी के लिए पुलिस जिम्मेदार थी।

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के पदाधिकारियों ने कहा था कि किसानों ने नहीं बल्कि पुलिस ने सड़कों को अवरुद्ध किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘‘उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर फिर से खोला जा रहा है।’’

गाजीपुर सीमा विरोध स्थल पर बैरिकेड्स हटाने के मद्देनजर, बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने कहा, “वर्तमान में जारी किसानों के आंदोलन का भविष्य संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा तय किया जाएगा।’’

वरिष्ठ किसान नेता और एसकेएम सदस्य दर्शन पाल ने कहा कि किसानों के खिलाफ झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं कि उन्होंने सड़कों को अवरुद्ध कर दिया है, जिसे हमने पहले दिन से खारिज किया है।’’ पाल ने कहा कि सिंघू बॉर्डर पर किसानों ने सड़क के उस हिस्से पर कब्जा कर लिया है, जो पहले से ही फ्लाईओवर के निर्माण के कारण यातायात के लिए बंद है।

पाल ने ‘पीटीआई-’ से कहा, ‘‘अब, पुलिस द्वारा बैरिकेड्स हटाने की कवायद स्पष्ट रूप से हमारी बात को साबित करती है कि वह पुलिस थी, जिसने सड़कों को अवरुद्ध किया था, न कि किसानों ने। हमने कभी कोई समस्या नहीं खड़ी की।’’

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