देश की खबरें | फडणवीस ने पॉडकास्ट 'महाराष्ट्र धर्म' की शुरूआत की, राज्य के विरासत को संरक्षित करने का आग्रह किया

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मुंबई, छह जुलाई महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने रविवार को नागरिकों से राज्य के संतों और महापुरुषों द्वारा साझा किये गए ज्ञान को संरक्षित करने की अपील की तथा इसे एक जिम्मेदारी बताया।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र न केवल योद्धाओं की जन्म भूमि है, बल्कि धर्म के रक्षक, राष्ट्र के दूरदर्शी और आधुनिक भारत के निर्माता भी पैदा किए हैं।

फडणवीस ने कहा, ‘‘भले ही हम ज्ञानेश्वर, शिवाजी महाराज, सावित्रीबाई फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के प्रत्यक्ष वंशज न हों, लेकिन हम उनकी बौद्धिक विरासत के वाहक हैं। अपने ज्ञान, बलिदान और साहस से उन्होंने इस राज्य को आकार दिया है।’’

वह ‘आषाढ़ी एकादशी’ पर लॉन्च किये गए अपने पॉडकास्ट ‘महाराष्ट्र धर्म’ की पहली कड़ी में बोल रहे थे।

फडणवीस ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र के संतों और महापुरुषों की बौद्धिक विरासत को संरक्षित करना और उसे आगे बढ़ाना हमारा कर्तव्य है।’’

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र धर्म महज पुरानी यादें नहीं है, यह लोगों का नैतिक मार्गदर्शन है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र धर्म यह समझना है कि हम कौन हैं और हम क्या बनना चाहते हैं।’’

पहली कड़ी का शीर्षक था ‘महाराष्ट्र धर्म: स्थापना और निर्माण’, जिसमें रामायण और महाभारत से लेकर गौतम बुद्ध की शिक्षाओं और महाराष्ट्र की आध्यात्मिक यात्रा के विकास तक के विषयों को शामिल किया गया।

फडणवीस ने कहा, ‘‘महाराष्ट्र धर्म महज कोई धर्म नहीं है, यह नैतिकता की जीवंत संहिता है। यह हमें बुद्धिमानी से सोचने, सेवाभाव से काम करने और साहस के साथ खड़े होने का आग्रह करता है। संत ज्ञानेश्वर के उपदेशों से लेकर शिवाजी महाराज की तलवार तक, महात्मा फुले की बहादुरी से लेकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के दृष्टिकोण तक, यह सिलसिला कभी नहीं टूटा। यह हमेशा आगे बढ़ता रहा है।’’

उन्होंने भगवान विट्ठल का आशीर्वाद लेने के लिए पंढरपुर तक पैदल जाने वाले भक्तों की ‘वारी’ परंपरा के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व स्तर पर शायद ही कभी ऐसी तीर्थयात्रा होती है, जो सामाजिक समानता का प्रतीक हो।’’

छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए उन्होंने कहा कि महान राजा ने सत्ता के लिए नहीं, बल्कि धर्म, देश और संस्कृति के लिए लड़ाई लड़ी।

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