देश की खबरें | ईडब्ल्यूएस कोटा: न्यायालय ने कहा-सरकार की नीतियों के लिए आर्थिक मानदंड निषिद्ध नहीं

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि सरकारी नीतियों का लाभ लक्षित समूह तक पहुंचाने के लिए आर्थिक उपाय किये जाने को प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

नयी दिल्ली, 14 सितम्बर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि सरकारी नीतियों का लाभ लक्षित समूह तक पहुंचाने के लिए आर्थिक उपाय किये जाने को प्रतिबंधित नहीं किया गया है।

न्यायालय ने शिक्षण संस्थानों में नामांकन और नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर (ईडब्ल्यूएस) वर्ग को 10 प्रतिशत आरक्षण दिये जाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई के दौरान यह मौखिक टिप्पणी की।

कई वकीलों ने प्रधान न्यायाधीश उदय उमेश ललित की अध्यक्षता वाली पांच-सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष दलील दी कि किसी परिवार की वित्तीय स्थिति के एकमात्र मानदंड के आधार पर ईडब्ल्यूएस कोटा तय करना असंवैधानिक है, क्योंकि संविधान के तहत इस तरह के आरक्षण को गरीबी उन्मूलन योजना के हिस्से के तौर पर मंजूर नहीं किया जाता है।

संविधान पीठ में न्यायमूर्ति ललित के अलावा न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी, न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट, न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला भी शामिल थे।

वकीलों ने कहा कि ईडब्ल्यूएस कोटा ''पूरी तरह से अनुचित, मनमाना, अवैध और असंवैधानिक'' है और इंदिरा साहनी या मंडल कमीशन मामले में न्यायालय के फैसले को पलटने के लिए सरकार के ‘विधायी निर्णय’ की श्रेणी में आता है।

सुनवाई के दौरान संविधान पीठ ने कहा, ''सरकार आर्थिक मानदंडों के आधार पर नीतियां बनाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसी नीतियों का लाभ लोगों तक पहुंचे और आर्थिक मानदंड एक अनुमेय आधार है और वर्गीकरण के लिए एक उचित आधार का हिस्सा है। यह (ऐसा करना) प्रतिबंधित नहीं है।''

शुरुआत में, एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील रवि वर्मा कुमार ने आरक्षण की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का हवाला दिया और चंपकम दोरईराजन के मामले में शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला दिया, जिसके कारण संविधान में पहला संशोधन हुआ था।

आंकड़ों का जिक्र करते हुए वकील रवि वर्मा कुमार ने कहा कि ओबीसी, एससी और एसटी की आबादी 85 फीसदी है और उन्हें करीब 50 फीसदी कोटा दिया जा रहा है और पांच फीसदी ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी कोटा मिलेगा।

एक अन्य याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी विल्सन ने ईडब्ल्यूएस कोटा का विरोध करते हुए कहा कि इसे एससी, एसटी और ओबीसी के लिए आरक्षण के साथ नहीं जोड़ा जा सकता है।

गौरतलब है कि 10 प्रतिशत ईडब्ल्यूएस कोटा एससी, एसटी और ओबीसी के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण के अतिरिक्त है। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने संविधान में संशोधन के माध्यम से नामांकन और नौकरियों में ईडब्ल्यूएस को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं से उत्पन्न होने वाले निर्णय के लिए तीन व्यापक मुद्दे तय किए थे।

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