विदेश की खबरें | यूक्रेन में जारी जंग के बीच बड़े पैमाने पर रूसी युद्ध अपराधों के प्रमाण मिले
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. यूक्रेन अभी रूस के संभावित युद्ध अपराधों के 58 हजार से अधिक मामलों की जांच कर रहा है, जिनमें हत्या, अपहरण, अंधाधुंध बमबारी और यौन हमलों से जुड़े मामले शामिल हैं।
यूक्रेन अभी रूस के संभावित युद्ध अपराधों के 58 हजार से अधिक मामलों की जांच कर रहा है, जिनमें हत्या, अपहरण, अंधाधुंध बमबारी और यौन हमलों से जुड़े मामले शामिल हैं।
‘द एसोसिएटेड प्रेस’ (एपी) और ‘फ्रंटलाइन’ की रिपोर्ट में स्वतंत्र रूप से 600 से अधिक ऐसे मामलों की पहचान की गई है, जिनमें युद्ध कानूनों का उल्लंघन किए जाने के संकेत मिलते हैं। इनमें से कुछ मामले सैकड़ों नागरिकों का नरसंहार करने वाले हमलों से जुड़े हैं।
द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय में मुख्य अभियोजक करीम खान ने ‘एपी’ से कहा, “यूक्रेन एक अपराध स्थल है।” उनकी यह टिप्पणी एक कड़वा सच है। प्राधिकारियों के पास यूक्रेन में बड़े पैमाने पर रूसी युद्ध अपराधों के प्रमाण हैं। हालांकि, निकट भविष्य में यूक्रेनी नागरिकों पर हमला करने वाले सैनिकों, उन्हें आदेश देने वाले सैन्य अधिकारियों और हमलों को मंजूरी प्रदान करने वाले राजनेताओं को गिरफ्तार करने की कोई संभावना नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कई वजहें हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेनी अधिकारी युद्ध क्षेत्र में पुख्ता सबूत जुटाने में काफी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। यही नहीं, कथित युद्ध अपराधों को अंजाम देने वाले ज्यादातर सैनिक यूक्रेनी अधिकारियों की गिरफ्त से बचने में सफल रहे हैं और अब रूसी सीमा में दाखिल हो चुके हैं।
यहां तक कि सफल अभियोगों में भी न्याय सीमित रहा है। मिसाल के तौर पर 21 वर्षीय टैंक कमांडर वादिम शिशमारिन से जुड़ा मामला ले लें, जो युद्ध अपराधों के आरोपों का सामना करने वाला पहला रूसी सैनिक था। उसने इस साल मार्च में आत्मसमर्पण कर दिया था। मई में कीव की एक अदालत उसे 62 वर्षीय एक यूक्रेनी नागरिक को सिर में गोली मारने के जुर्म में दोषी करार दिया।
शिशमारिन को पहले उम्रकैद की सजा सुनाई गई, जिसे अपील के बाद घटाकर 15 साल के कारावास की सजा कर दिया गया। आलोचकों का कहना था कि शिशमारिन को सुनाई गई प्रारंभिक सजा अनुचित रूप से कठोर थी, यह देखते हुए कि उसने अपना अपराध कबूल किया था। उन्होंने तर्क दिया कि शिशमारिन आदेशों का पालन कर रहा था और उसने अपने किए पर पछतावा जाहिर किया था।
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