देश की खबरें | पर्यावरण संरक्षण भारत की प्रतिबद्धता, मजबूरी नहीं: प्रधानमंत्री मोदी
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नयी दिल्ली, 22 फरवरी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारत के लिए कोई मजबूरी नहीं बल्कि प्रतिबद्धता है। उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि विकास और प्रकृति एक साथ कदमताल कर सकते हैं।
उन्होंने यहां ‘द एनर्जी एंड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट’ (टेरी) द्वारा आयोजित विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसडीएस) में एक संदेश के माध्यम से कहा कि भारत ऊर्जा के नवीकरणीय और वैकल्पिक स्रोतों से अपनी बिजली की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने का प्रयास कर रहा है।
उन्होंने कहा कि देश नवीनतम प्रौद्योगिकी और नवाचार के माध्यम से विभिन्न शहरी चुनौतियों, विशेष रूप से प्रदूषण और स्वच्छता से संबंधित चुनौतियों का समाधान तैयार कर रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम पृथ्वी को मां के रूप में पूजते हैं। हमारे शास्त्र कहते हैं कि ‘पृथ्वी हमारी मां है और हम उसके बच्चे हैं’।’’
प्रधानमंत्री ने कहा कि सार्वभौमिक भाईचारे की भावना ने लगातार राष्ट्र और उसके लोगों का मार्गदर्शन किया है।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने की ऐसी गौरवशाली संस्कृति और उत्कृष्ट परंपराओं के दर्शन के साथ, भारत के लिए पर्यावरण संरक्षण के वास्ते वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे रहना स्वाभाविक है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा दृढ़ विश्वास है कि विकास और प्रकृति साथ-साथ चल सकते हैं। सतत विकास को रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बनाने के उद्देश्य से हमने ‘मिशन लाइफ’ की शुरुआत की। इस मिशन का उद्देश्य पर्यावरण के लिए जीवन शैली अपनाना है। पर्यावरण आज केवल एक वैश्विक मुद्दा नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक व्यक्तिगत और सामूहिक जिम्मेदारी भी है।’’
मोदी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारत के लिए प्रतिबद्धता है, कोई मजबूरी नहीं। उन्होंने कहा कि बेहतर माहौल के बिना मानव सशक्तीकरण असंभव है और आगे का रास्ता चयनात्मकता के बजाय सामूहिकता से है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वस्थ और स्वच्छ जीवन शैली अपनाने की भारत की पहल में इलेक्ट्रिक गतिशीलता को प्रोत्साहित करने के लिए बुनियादी ढांचे का उन्नयन, परिवहन के लिए जैव ईंधन का उपयोग बढ़ाना, ईंधन के रूप में हाइड्रोजन का लाभ उठाना, अपशिष्ट को धन में परिवर्तित करना और स्वच्छ नदियों को सुनिश्चित करने के लिए जल उपचार संयंत्र शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि देश ने टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने के लिए एक बहुआयामी दृष्टिकोण अपनाया है, चाहे वह गरीबों के उत्थान और सशक्तीकरण के उपायों के माध्यम से हो या जैविक खेती को प्रोत्साहित करना हो या फिर किसानों को प्रकृति की अनिश्चितताओं से बचाना हो।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत दुनियाभर के देशों के लिए एक प्रेरणा के रूप में उभर रहा है, विशेष रूप से इस तथ्य पर कि आर्थिक विकास और पर्यावरण का संरक्षण साथ-साथ चल सकता है।
उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि वह कभी भी समस्या का हिस्सा नहीं रहा है और समाधान का हिस्सा बनने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
यादव ने कहा कि केंद्रीय बजट में ‘‘हरित वृद्धि’’ पर ध्यान केंद्रित करने से इस बात की पुष्टि होती है कि कैसे सतत विकास को भारतीय नीति निर्माण प्रक्रिया में एक दूरदर्शी दृष्टिकोण के माध्यम से मुख्यधारा में लाया गया है।
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