देश की खबरें | शर्तों के उल्लंघन पर राजनीतिक दलों की मान्यता रद्द करने की निर्वाचन आयोग को शक्ति मिले: याचिकाकर्ता
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नयी दिल्ली, 27 नवंबर उच्चतम न्यायालय से एक याचिकाकार्ता ने आग्रह किया है कि निर्वाचन आयोग को पंजीकरण की अनिवार्य शर्तों का उल्लंघन करने और कानून तोड़ने के मामले में राजनीतिक दलों का पंजीयन समाप्त करने की शक्ति अवश्य होनी चाहिए।
याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी याचिका पर मंगलवार को अहम सुनवाई होने से पहले नयी लिखित दलीलों में आयोग को अधिक दंडात्मक शक्तियां प्रदान करने का अनुरोध किया है।
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ उपाध्याय सहित उन लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिन्होंने कहा है कि है कि राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव पूर्व मुफ्त उपहारों का वादा किया जाना एक भ्रष्ट आचरण है और यह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत ‘‘रिश्वत’’ के समान है।
इन याचिकाओं में यह भी कहा गया है कि निर्वाचन आयोग को इस आचरण से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए सशक्त किया जाना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया और अधिवक्ता अश्विनी कुमार दुबे के माध्यम से दाखिल लिखित दलीलों में कहा गया है कि इन अनिवार्य शर्तों और/या ऐसी अन्य शर्तों को पूरा करने में नाकाम रहने पर निर्वाचन आयोग को किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण रद्द करने की शक्ति प्रदान की जाए।
दलीलों के अनुसार, ‘‘निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दलों का पंजीयन जारी रखने के लिए दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया जा सकता है।’’ इसके साथ ही इनमें अनिवार्य शर्तों का उल्लेख किया गया है जिनके उल्लंघन पर आयोग की ओर से दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
इनमें एक प्रस्तावित शर्त के अनुसार, ‘‘राजनीतिक दलों को हर साल एक प्रमाणपत्र जमा करना होगा, जिसमें प्रमाणपत्र दाखिल करने के वर्ष से पहले 31 दिसंबर को अधिसूचित पते पर उसके अस्तित्व और उसके पंजीकृत सदस्यों की कुल संख्या को प्रमाणित करना होगा।’’
वर्तमान में, आठ मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दल और 56 राज्य-स्तरीय मान्यता प्राप्त दल हैं।
देश में पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की कुल संख्या 2,796 है।
मामले में सुनवाई मंगलवार को भी जारी रहेगी।
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