जरुरी जानकारी | बीते सप्ताह खाद्य तेल कीमतों में मिला-जुला रुख

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे आयातित हल्के (सॉफ्ट) खाद्य तेलों की कीमतें टूटने से स्थानीय तेल कीमतों पर दबाव बढ़ने तथा जाड़े व शादी-विवाह के मौसम की मांग के बीच बीते सप्ताह दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में खाद्य तेल कीमतों में कारोबार का मिला-जुला रुख दिखा। सरसों तेल, मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल और पामोलीन तेल कीमतों में जहां सुधार आया, वहीं सरसों पेराई में मिल वालों को नुकसान होने से सरसों तिलहन कीमतों में गिरावट आई।

नयी दिल्ली, 11 दिसंबर सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे आयातित हल्के (सॉफ्ट) खाद्य तेलों की कीमतें टूटने से स्थानीय तेल कीमतों पर दबाव बढ़ने तथा जाड़े व शादी-विवाह के मौसम की मांग के बीच बीते सप्ताह दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में खाद्य तेल कीमतों में कारोबार का मिला-जुला रुख दिखा। सरसों तेल, मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल और पामोलीन तेल कीमतों में जहां सुधार आया, वहीं सरसों पेराई में मिल वालों को नुकसान होने से सरसों तिलहन कीमतों में गिरावट आई।

शुल्कमुक्त आयात काफी सस्ता होने से सोयाबीन तेल कीमतों में भी गिरावट आई। बाकी तेल-तिलहनों के भाव पूर्ववत रहे।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि तेल पेराई मिलों को सरसों की पेराई करने में 4-5 रुपये प्रति किलो का नुकसान है। मिल वालों की मांग कमजोर होने से सरसों तिलहन में गिरावट आई। नीचे भाव में तेल मिलों द्वारा बिकवाली कम करने से सरसों तेल कीमतों में मामूली सुधार आया।

सूत्रों ने कहा कि विदेशों में सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के दाम में पिछले छह माह के दौरान 70-90 रुपये किलो की गिरावट आई है। दूसरी ओर सरकार ने कीमतों को कम करने के मकसद से सोयाबीन और सूरजमुखी तेल के आयात को शुल्कमुक्त करते हुए कोटा प्रणाली लागू कर दिया जिसके अनपेक्षित रूप से उल्टे परिणाम देखने को मिले हैं। स्थानीय तेल उद्योग संकट में है क्योंकि उनकी पेराई की लागत सस्ते खाद्य तेल के आयात भाव से काफी महंगी बैठती है। इससे किसानों को कोई फायदा नहीं मिल रहा क्योंकि उनके तिलहन की खपत प्रभावित हुई है। उपभोक्ताओं को तेल सस्ता होने के बजाय काफी ऊंची दरों पर मिल रहा है।

सूत्रों ने कहा कि पिछले नवंबर में समाप्त हुए तेल वर्ष में खाद्य तेलों के आयात में 6.8 प्रतिशत यानी नौ लाख टन सालाना की वृद्धि हुई है जिसका साफ मतलब है कि अपनी जरूरत के लिए लगभग 60 प्रतिशत खाद्य तेलों के आयात पर निर्भर इस देश में सरसों और सोयाबीन जैसे तिलहन का उत्पादन बढ़ने के बाद भी सस्ते आयातित तेल के कारण देशी तिलहन बाजार में खप नहीं रहा है। खाद्य तेल आयात पर विदेशी मुद्रा खर्च भी पहले के 1,17,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,57,000 करोड़ रुपये हो गया है।

सूत्रों ने कहा कि सोयाबीन के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक होने के बावजूद पिछले साल से कम होने के कारण मंडियों में किसान कम माल ला रहे हैं जिससे सोयाबीन तिलहन कीमतों में सुधार आया। मंडियों में जो सोयाबीन की आवक पिछले सप्ताह लगभग आठ लाख बोरी की थी वह घटकर लगभग पांच लाख बोरी रह गई है। दूसरी ओर विदेशों से सस्ता आयात होने के कारण सोयाबीन तेल कीमतों में गिरावट आई।

सूत्रों ने कहा कि किसानों द्वारा नीचे भाव में बिकवाली नहीं करने और उपभोक्ता मांग बढ़ने के कारण मूंगफली तेल- तिलहन कीमतों में सुधार आया।

सूत्रों ने कहा कि इस वर्ष मंडियों में बिनौला, कपास नरमा की आवक घटकर लगभग आधी रह गई है जिससे बिनौला तेल कीमतों में सुधार आया। गौरतलब है कि पशु आहार के लिए सबसे अधिक यानी लगभग 110 लाख टन खल की प्राप्ति बिनौले से होती है।

सूत्रों ने कहा कि भाव नीचे होने के कारण कच्चे पामतेल (सीपीओ) और पामोलीन तेल की भारी मांग है जिससे इन दोनों तेलों की कीमतों में मामूली मजबूती दिखी। उन्होंने कहा कि पाम, पामोलीन देशी तेलों के कीमत पर ज्यादा असर नहीं डालते और इसकी ज्यादा खपत कमजोर आय वर्ग के लोग करते हैं। देशी तेल-तिलहनों पर सबसे अधिक असर सूरजमुखी और सोयाबीन जैसे हल्के तेल डालते हैं जिसकी खपत उच्च आय वर्ग के लोग करते हैं। सरकार ने रैपसीड तेल पर जो 38.5 प्रतिशत आयात शुल्क लगा रखा है उसी तरह बाकी आयातित हल्के तेलों पर भी लगाया जाना चाहिये जो समय की मांग है।

सूत्रों ने कहा कि तेल-तिलहन की महंगाई में सबसे बड़ी दिक्कत बड़ी खाद्य तेल कंपनियों के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) निर्धारण की प्रथा में छिपी है, जिसका कोई नियम नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कोई समूह जाकर बाजार में मॉल या बड़ी दुकानों में सूरजमुखी, मूंगफली, सोयाबीन रिफाइंड, सरसों आदि खाद्य तेलों के भाव की जांच करे तो ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जायेगा। इस पहलू पर भी ध्यान देना चाहिए कि किसानों से तिलहन की खरीद किस भाव पर की गई थी या बंदरगाह पर इसके आयातित तेल का थोक भाव क्या है।

उन्होंने कहा कि तेल कीमतों के बढ़ने की खबरों के आने पर सरकार जब तेल कंपनियों को कीमतें कम करने के लिए कहती है, तो पहले से 60-100 रुपये के बढ़े हुए एमआरपी में ये कंपनियां सिर्फ 15 रुपये प्रति लीटर की कमी करती हैं।

सूत्रों के मुताबिक, पिछले सप्ताहांत के मुकाबले बीते सप्ताह सरसों दाने का भाव 25 रुपये घटकर 7,075-7,125 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। दूसरी ओर सरसों दादरी तेल समीक्षाधीन सप्ताहांत में 50 रुपये बढ़कर 14,050 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। वहीं सरसों पक्की घानी और कच्ची घानी तेल की कीमतें भी क्रमश: 10-10 रुपये बढ़कर क्रमश: 2,130-2,260 रुपये और 2,190-2,315 रुपये टिन (15 किलो) पर बंद हुईं।

सूत्रों ने कहा कि पिछले साल के मुकाबले कम भाव पर किसानों की बिकवाली घटने से समीक्षाधीन सप्ताह में सोयाबीन दाने और लूज के थोक भाव क्रमश: 100-100 रुपये बढ़कर क्रमश: 5,550-5,650 रुपये और 5,360-5,410 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

दूसरी ओर सस्ते आयातित तेल के दबाव में समीक्षाधीन सप्ताहांत में सोयाबीन दिल्ली, सोयाबीन इंदौर और सोयाबीन डीगम तेल क्रमश: 500 रुपये, 400 रुपये और 350 रुपये की हानि के साथ क्रमश: 12,900 रुपये, 12,850 रुपये और 11,150 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ।

किसानों द्वारा नीचे भाव में बिकवाली नहीं करने से समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तेल-तिलहनों कीमतों में सुधार देखने को मिला। समीक्षाधीन सप्ताहांत में मूंगफली तिलहन का भाव 50 रुपये बढ़कर 6,410-6,470 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। पूर्व सप्ताहांत के बंद भाव के मुकाबले समीक्षाधीन सप्ताह में मूंगफली तेल गुजरात 200 रुपये बढ़कर 15,000 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ जबकि मूंगफली साल्वेंट रिफाइंड का भाव 25 रुपये बढ़कर 2,415-2,680 रुपये प्रति टिन पर बंद हुआ।

सूत्रों ने कहा कि सस्ता होने की वजह से वैश्विक मांग बढ़ने के बीच सीपीओ और पामोलीन तेल कीमतों में मजबूती आई। समीक्षाधीन सप्ताह में कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 50 रुपये बढ़कर 8,500 रुपये क्विंटल पर बंद हुआ। जबकि पामोलीन दिल्ली का भाव 50 रुपये बढ़कर 10,000 रुपये हो गया। पामोलीन कांडला का भाव 9,000 रुपये प्रति क्विंटल पर अपरिवर्तित बंद हुआ।

सस्ते आयात के बावजूद मंडियों में बिनौला, कपास नरमा की आवक लगभग आधी रह जाने से समीक्षाधीन सप्ताह में बिनौला तेल भी 11,450 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर पर अपरिवर्तित रहा।

राजेश

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

संबंधित खबरें

SRH vs CSK, IPL 2026 27th Match Live Toss And Scorecard: राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम में चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान रुतुराज गायकवाड़ ने जीता टॉस, पहले गेंदबाजी करने का किया फैसला; यहां देखें दोनों टीमों की प्लेइंग इलेवन और लाइव स्कोरकार्ड

Punjab State Dear Baisakhi Bumper Lottery 2026 Result: आज हुआ 6 करोड़ के विजेता का ऐलान, जानें कैसे चेक करें रिजल्ट

SRH vs CSK, IPL 2026 27th Match Stats And Preview: टूर्नामेंट के 27वें मुकाबले में जीत की राह पर लौटना चाहेंगी सनराइजर्स हैदराबाद और चेन्नई सुपरकिंग्स, मैच से पहले जानें स्टैट्स एंड प्रीव्यू

SRH vs CSK, IPL 2026 27th Match Toss Winner Prediction: राजीव गांधी क्रिकेट स्टेडियम में सनराइजर्स हैदराबाद बनाम चेन्नई सुपरकिंग्स के बीच कौन होगा टॉस का बॉस? मैच से पहले जानें किस टीम के पक्ष में जा सकता है टॉस