जरुरी जानकारी | शिकागो एक्सचेंज में कल रात की मजबूती से खाद्य तेल तिलहन कीमतों में सुधार का रुख

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नयी दिल्ली, 24 जून शिकागो एक्सचेंज में कल रात मजबूती दर्ज होने के बाद शनिवार को दिल्ली बाजार में खाद्यतेल तिलहन बाजार में सरसों, सोयाबीन खाद्यतेल तिलहन, पामोलीन और बिनौला तेल कीमतों में मजबूती देखने को मिली। दूसरी ओर कोई कामकाज नहीं होने से कच्चा पामतेल (सीपीओ) और साधारण कारोबार के बीच मूंगफली तेल तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

कल रात शिकागो एक्सचेंज दो प्रतिशत मजबूत बंद हुआ था।

तेल तिलहन कारोबार के सूत्रों ने बताया कि आयातित सस्ते खाद्यतेलों की देश में भरमार है। पूरे विश्व में लगभग यही हाल है। हल्के तेलों की देश की मंडियों में प्रचूरता ने देशी तिलहन किसानों की देशी तिलहनों का खपना दूभर कर दिया है और तिलहन पेराई करने वाली मिलों को पेराई करने में नुकसान है क्योंकि सस्ते आयातित तेलों के आगे एक तो देशी तिलहन उन्हें महंगे में खरीदना पड़ता है और ऊपर से पेराई की और लागत उसमें जुड़ने से उनके तेल बेपड़ता हो जाते हैं।

भारत अपनी लगभग 55-60 प्रतिशत खाद्यतेलों की जरुरत को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर करता है। सूत्रों ने कहा कि यह एक विसंगति है कि देशी सरसों तिलहन का स्टॉक किसानों के पास बचा रहे और खाद्य तेलों का आयात पिछले साल के मुकाबले और बढ़ जाये।

तेलवर्ष 2021-22 में नवंबर तक खाद्यतेलों का आयात बढ़कर एक लाख 57 हजार करोड़ रुपये का हो गया जो आयात साल भर पहले वर्ष 2020-21 में एक लाख 17 हजार करोड़ रुपये का हुआ था।

साल्वेंट एक्स्ट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने भी कहा है कि देश के किसानों को पिछले वर्ष सरसों के लिए लगभग 7,000-7,500 रुपये क्विन्टल का भाव मिला था जो इस बार न्यूनतम समर्थन मूल्य (5,450 रुपये क्विन्टल) से भी काफी कम यानी 4,700-4,800 रुपये क्विन्टल का भाव दिया जा रहा है। इस वजह से किसान बहुत कम बिकवाली कर रहे हैं।

सूत्रों ने कहा कि तेल तिलहन कारोबार से देश का डेयरी क्षेत्र, मुर्गीपालन का व्यवसाय काफी जुड़ाव रखता है। खल और डीआयल्ड केक (डीओसी) के महंगा होने से पिछले दिनों कई बार दूध के दाम बढ़े हैं। दूध के दाम बढ़ने से दूध, घी, मक्खन, पनीर, दही और छाछ तथा डीओसी के दाम बढ़ने से अंडे, मुर्गा मांग के दाम बढ़ते हैं तो ये महंगाई पर ज्यादा असर डालेंगे। इन कारणों से भी देश के तेल तिलहन उद्योग को अपने पैरों पर खड़ा होना पड़ेगा और इसके लिए सरकार को देशी तेल तिलहनों का बाजार विकसित करने के लिहाज से सारी नीतियां बनानी होंगी। मलेशिया जैसा छोटा सा देश भी अपने तेल तिलहन उद्योग के हितों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाता है। यही वजह है कि पिछले 30 वर्षो में वहां का पामतेल उत्पादन लगभग 20 गुना बढ़ गया है।

उन्होंने कहा कि सीपीओ में कारोबार नहीं के बराबर है और सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 4,845-4,945 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,605-6,665 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,530 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,460-2,735 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 9,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,600 -1,680 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,600 -1,710 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 9,700 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,450 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,200 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,350 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,240-5,305 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,005-5,070 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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