देश की खबरें | ईडी ने चीन नियंत्रित एनबीएफसी का 131 करोड़ रुपये का कोष जब्त किया
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नयी दिल्ली, 30 सितंबर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने विदेशी विनियमन कानून के उल्लंघन के मामले में एक चीनी नागरिक के स्वामित्व वाली एनबीएफसी का 131 करोड़ रुपये का कोष जब्त किया है।
‘नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी’ (एनबीएफसी) पीसी फाइनेंशियल प्राइवेट लिमिटेड है और यह संदिग्ध विदेशी बाह्य प्रेषण के लिए अपने मोबाइल ऐप ‘कैशबीन’ के जरिए तत्काल व्यक्तिगत सूक्ष्म ऋण उपलब्ध कराने के काम में शामिल थी।
यह मामला ईडी की नजरों में मोबाइल ऐप के जरिए तत्काल व्यक्तिगत सूक्ष्म ऋण उपलब्ध कराने के काम से जुड़ीं कुछ एनबीएफसी और फिनटेक कंपनियों के खिलाफ धनशोधन के एक अलग मामले में जांच के दौरान आया था।
यह ऋण अत्यधिक ब्याज दर पर दिया जा रहा था और अवैध रूप से उपभोक्ता का डेटा इस्तेमाल कर कॉल सेंटरों के जरिए गाली-गलौज कर इसकी वसूली की जा रही थी।
पिछले साल, इन ऐप की अवैधता के बारे में कई राज्यों से सूचना मिली थी, खासकर कोविड-19 लॉकडाउन के चलते खराब आर्थिक हालात के बाद और इन ‘‘संदिग्ध’’ कंपनियों की धमकियों तथा वसूली की वजह से कई लोगों के आत्महत्या करने की खबरें मिली थीं।
कोष विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत ईडी ने विभिन्न बैंकों में जमा 106.93 करोड़ रुपये का कोष जब्त किया है।
इसने इसी तरह अगस्त में इसी एनबीएफसी का 106.93 करोड़ रुपये का कोष जब्त किया था।
ईडी ने कहा कि जांच में पाया गया कि पीसीएफएस की विदेशी मूल कंपनियां उधार कारोबार के लिए 173 करोड़ रुपये का एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) लेकर आईं और कम समय के भीतर, संबंधित विदेशी कंपनियों से प्राप्त सॉफ्टवेयर सेवाओं के लिए भुगतान के नाम पर 429.29 करोड़ रुपये का विदेशी बाह्य प्रेषण किया।
इसने कहा, ‘‘पीसीएफएस ने 941 करोड़ रुपये का उच्च घरेलू व्यय भी दिखाया। एनबीएफसी द्वारा भुगतान किए गए विदेशी खर्चों की विस्तृत जांच से पता चला कि अधिकांश भुगतान विदेशी कंपनियों को किए गए थे, जो उन्हीं चीनी नागरिकों के स्वामित्व में हैं, जो ओपेरा समूह के मालिक हैं।’’
ईडी ने कहा, "सभी विदेशी सेवा प्रदाताओं को चीन के मालिकों द्वारा चुना गया था और सेवाओं की कीमत भी उनके द्वारा तय की गई थी।"
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