विदेश की खबरें | म्यामां में भूकंपः मृतक संख्या 3000 के पार, सेना ने संघर्षविराम घोषित किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. सेना की उच्च कमान की यह घोषणा बुधवार देर शाम सरकारी टेलीविजन एमआरटीवी पर प्रसारित की गई। घोषणा में कहा गया कि यह संघर्षविराम 22 अप्रैल तक जारी रहेगा और इसका उद्देश्य शुक्रवार के भूकंप से प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित करना है।
सेना की उच्च कमान की यह घोषणा बुधवार देर शाम सरकारी टेलीविजन एमआरटीवी पर प्रसारित की गई। घोषणा में कहा गया कि यह संघर्षविराम 22 अप्रैल तक जारी रहेगा और इसका उद्देश्य शुक्रवार के भूकंप से प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूति प्रदर्शित करना है।
यह घोषणा सैन्य शासन का विरोध करने वाले सशस्त्र प्रतिरोध संगठनों द्वारा घोषित एकतरफा अस्थायी युद्ध विराम के बाद की गई है।
सेना के बयान में कहा गया है कि इन संगठनों को राज्य पर हमला करने या फिर से संगठित होने से बचना चाहिए, अन्यथा सेना ‘आवश्यक’ कदम उठाएगी।
बुधवार को इससे पहले, बचावकर्मियों ने भूकंप के पांच दिन बाद देश की राजधानी में एक होटल के खंडहरों से दो लोगों को जीवित निकाला और एक अन्य शहर के गेस्टहाउस से तीसरे व्यक्ति को जीवित निकाला। लेकिन अधिकतर टीम को केवल शव ही मिल रहे थे।
शुक्रवार दोपहर भूकंप आने के कारण हज़ारों इमारतें ढह गईं, पुल ढह गए और सड़कों में जगह-जगह दरारें पड़ गईं।
एमआरटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को मरने वालों की संख्या बढ़कर 3,003 हो गई, जबकि 4,500 से ज़्यादा लोग घायल हुए हैं। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार हताहतों की संख्या इससे कहीं ज़्यादा है।
म्यांमा गृहयुद्ध से जूझ रहा है और इस भूकंप ने मानवीय संकट को और गहरा कर दिया है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, भूकंप आने से पहले ही 30 लाख से ज़्यादा लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके थे और लगभग दो करोड़ लोग जरूरतमंद थे।
सेना से लड़ने वाले दो प्रमुख सशस्त्र प्रतिरोध बलों ने भूकंप के प्रति मानवीय राहत एवं बचाव कार्रवाई को सुगम बनाने के लिए संघर्ष विराम की घोषणा की थी। लेकिन सेना ने शुरू में अपने हमलों में नरमी नहीं दिखाई थी।
सेना ने 2021 में आंग सान सू की की लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार से सत्ता छीन ली थी।
एपी
टेलीविजन पर प्रसारित खबर में कहा गया कि जातीय सशस्त्र समूहों और स्थानीय विद्रोहियों को राज्य सुरक्षा बलों और सैन्य ठिकानों पर हमला करने से बचना चाहिए, तथा संगठित नहीं होना चाहिए, सेना को इकट्ठा नहीं करना चाहिए या क्षेत्र का विस्तार नहीं करना चाहिए।
बयान में कहा गया है कि यदि ये समूह इन शर्तों का पालन नहीं करते हैं तो सेना आवश्यक कदम उठाएगी।
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