वाराणसी, सात अगस्त श्रावण मास के सोमवार के मद्देनजर काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ के कारण ज्ञानवापी परिसर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की टीम का सर्वेक्षण कार्य तीन घंटे की देरी से शुरू हुआ, जो शाम पांच बजे तक चला।
शासकीय अधिवक्ता राजेश मिश्रा ने बताया कि श्रावण मास के सोमवार के अवसर पर ज्ञानवापी परिसर के ठीक बगल में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए एएसआई का सर्वे चौथे दिन तीन घंटे की देरी से पूर्वाह्न 11 बजे शुरू हुआ और शाम पांच बजे तक चला। उन्होंने कहा कि दोपहर में भोजन के लिए एक बजे से ढाई बजे तक के लिए सर्वेक्षण कार्य रोका गया था। उन्होंने कहा कि अब कल मंगलवार सुबह आठ बजे से सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया जाएगा।
मिश्रा ने बताया कि टीम पूरे परिसर के मापन, मैपिंग और फोटोग्राफी का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि एएसआई की टीम ने बाहर आ रहे अफवाहों पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और प्रशासन से इन अफवाहों को रोकने को कहा है।
मिश्रा के मुताबिक, इससे पहले रविवार को ज्ञानवापी मस्जिद के तीनों गुंबद और तहखाने का सर्वेक्षण कार्य किया गया। उन्होंने बताया कि इस दौरान तीनों गुंबद और तहखाने की मैपिंग और फोटोग्राफी की गई।
हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने बताया किएएसआई अपनी 42 सदस्यीय टीम को बांट कर पूरे परिसर का सर्वे कर रहा है। जैन ने कहा कि यह सोचना गलत होगा कि हर दिन कुछ नया मिलेगा क्योंकि परिसर के संरचना और वास्तुकला का विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण की टीम की रिपोर्ट के बाद ही निष्कर्ष का पता चलेगा।
इसके पहले रविवार को सर्वे का काम खत्म होने के बाद विष्णु शंकर जैन ने बताया था कि तीनों गुंबद की वैज्ञानिक जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा था, “फोटोग्राफी और मैपिंग का काम हो चुका है। तहखाने का सर्वेक्षण भी किया जा चुका है। सर्वेक्षण कार्य में अभी समय लगेगा।”
मुस्लिम पक्ष ने रविवार को आरोप लगाया था कि सर्वे के दौरान परिसर में मूर्ति और त्रिशूल मिलने की अफवाह फैलाई जा रही है, जिससे जनता में उन्माद फैल सकता है। उसने प्रशासन से इन अफवाहों के प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी।
मुस्लिम पक्ष के वकील मुमताज अहमद ने दावा किया था कि जिन हिस्सों में अभी सर्वे नहीं हुआ है, वहां भी मूर्ति और त्रिशूल मिलने की अफवाह फैलाई जा रही है।
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