देश की खबरें | डीटीसी दो बस डिपो पर वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति देगी, प्राप्त धन का उपयोग पुनरुद्धार के लिए होगा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) को उम्मीद है कि वह अपने बंदा बहादुर मार्ग और सुखदेव विहार बस डिपो पर वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति देकर लगभग 2,600 करोड़ रुपये अर्जित करेगा और इस राजस्व का उपयोग डीएमआरसी के परिसंपत्ति मुद्रीकरण मॉडल की तर्ज पर परिवहन सुविधाओं के पुनरुद्धार के लिए किया जाएगा।
नयी दिल्ली, 13 मई दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) को उम्मीद है कि वह अपने बंदा बहादुर मार्ग और सुखदेव विहार बस डिपो पर वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति देकर लगभग 2,600 करोड़ रुपये अर्जित करेगा और इस राजस्व का उपयोग डीएमआरसी के परिसंपत्ति मुद्रीकरण मॉडल की तर्ज पर परिवहन सुविधाओं के पुनरुद्धार के लिए किया जाएगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले सप्ताह स्वीकृत प्रस्ताव में दोनों डिपो का आत्मनिर्भर परियोजनाओं के माध्यम से पुनर्विकास करने पर विचार किया गया है, जिसके लिए डीटीसी से किसी निवेश की आवश्यकता नहीं होगी।
यह निगम की वित्तीय स्थिति में सुधार, पार्किंग क्षमता में वृद्धि, बहु-स्तरीय डिपो विकसित करने, आवासीय कॉलोनियों का पुनरुद्धार करने तथा बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए इसके डिपो और टर्मिनलों का वाणिज्यिक उपयोग करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।
अधिकारी ने बताया कि इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स इंडिया लिमिटेड (ईपीआईएल) द्वारा साझा किए गए अनुमान के अनुसार, बंदा बहादुर मार्ग डिपो परियोजना से 1,858 करोड़ रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है, जबकि सुखदेव विहार परियोजना से लगभग 758 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।
कंपनी ने पिछले साल आठ अक्टूबर को प्रस्ताव पेश किया था, जिसके बाद आठ नवंबर को एक विस्तृत परियोजना समयावधि और पिछली परियोजनाओं की सूची पेश की गई थी।
प्रस्तावित समयावधि के अनुसार, बंदा बहादुर मार्ग डिपो का निर्माण 28 महीने में पूरा होने की उम्मीद है, जबकि सुखदेव विहार परियोजना में 21 महीने लगेंगे।
डीटीसी 2,372 सीएनजी और 1,612 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन करती है जबकि 1,040 इलेक्ट्रिक बसें जल्द ही इसके बेड़े में शामिल की जाएंगी।
डीटीसी पार्किंग क्षमता का विस्तार करने तथा विज्ञापनों और मोबाइल टावर, बूथों और सरकारी कार्यालयों से किराये जैसे गैर-परिवहन स्रोतों से राजस्व बढ़ाने के तरीकों की खोज कर रही है।
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