ताजा खबरें | द्रमुक सांसद ने कृषि कानूनों को रद्द करने के संबंध में सरकार से आश्वासन मांगा

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. द्रमुक सांसद टी शिवा ने बुधवार को विवादों के घिरे तीन कृषि कानूनों को रद्द किए जाने के संबंध में सरकार से आश्वासन मांगा। इन कानूनों के खिलाफ कई किसान संगठन दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

नयी दिल्ली, तीन फरवरी द्रमुक सांसद टी शिवा ने बुधवार को विवादों के घिरे तीन कृषि कानूनों को रद्द किए जाने के संबंध में सरकार से आश्वासन मांगा। इन कानूनों के खिलाफ कई किसान संगठन दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

उन्होंने पिछले साल कृषि विधेयकों के पारित होने के तरीके को लेकर चिंता जतायी वहीं राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने जोर दिया कि सब कुछ नियम के अनुसार किया गया था।

शिवा ने राज्यसभा में कहा, "अपनी पार्टी के अध्यक्ष एम के स्टालिन की मांग के अनुसार, मैं सरकार से आग्रह करूंगा कि प्रधानमंत्री अपने जवाब में इन कृषि कानूनों को रद्द करने का आश्वासन दें।"

द्रमुक के उच्च उच्च सदन में सात सदस्य हैं और पार्टी ने तीनों कृषि विधेयकों का विरोध किया था।

राष्ट्रपति अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में हिस्सा ले रहे शिवा ने आसन से कहा, ‘‘हम किसानों के चल रहे आंदोलन के संबंध में चर्चा के लिए आपसे और समय का अनुरोध कर रहे हैं। आप जिस तरह से सदन का संचालन कर रहे हैं और इस उच्च सदन की गरिमा को बरकरार रखा है, उससे हमें खुशी है... हमें दो विधेयकों पर चर्चा के लिए चार घंटे आवंटित किए गए थे।’’

उन्होंने कहा कि आधा घंटा शून्यकाल में समाप्त होने के बाद विधेयकों पर चर्चा के लिए केवल साढ़े तीन घंटे बचे थे।

नायडू ने कहा कि पूरी बात प्रक्रिया के अनुसार की गई थी।

नायडू ने कहा कि उन्होंने गौर किया है और कांग्रेस पार्टी तथा सत्तारूढ़ पार्टी को छोड़कर अन्य सभी दलों ने अपने आवंटित समय का उपयोग किया था।

भाजपा सदस्य भूपेंद्र यादव ने कहा कि शिवा का बयान सही नहीं है और उसे रिकॉर्ड से हटा दिया जाना चाहिए।

नायडू ने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के 35 वक्ताओं ने अपने आवंटित समय का उपयोग किया था।

उन्होंने कहा, ‘‘दो दलों ने, जो भी कारण हों, अपने वक्ताओं की संख्या को कम कर लिया था। मैं उन्हें मजबूर नहीं कर सकता। यह गलत जानकारी है। जिस सदस्य ने मत विभाजन के लिए कहा था, वह अपनी सीट पर नहीं थे। वह आसन के समीप थे... यदि आपके पास संख्या है तो आप कभी भी सरकार का विरोध कर सकते हैं।’’

शिवा ने कहा कि वह अपनी सीट पर थे लेकिन सदन में व्यवस्था नहीं थी।

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