विदेश की खबरें | जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका के मुसलमानों के बीच नस्लवाद पर चर्चा

हालिया कुछ हफ्तों में अमेरिका में कई मुसलमानों ने देशभर में चल रही नस्लीय न्याय रैलियों में हिस्सा लिया है। इसके अलावा वे उपदेशों, बयानों और वेबिनारों में नस्लवाद को सिरे से खारिज करते नजर आ रहे हैं।

हिंद मक्की नामक छात्रा याद करती हैं कि जब वह इस्लामिक स्कूल में पढ़ती थीं, तो काले लोगों के लिये अरबी के शब्द ''गुलाम'' का इस्तेमाल किया जाता था।

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मक्की ने फ्लॉयड की मौत के बाद नस्ल के मुद्दे पर आयोजित डिजिटल चर्चा के दौरान कहा, ''करीब 85 प्रतिशत बार मुझे लोगों से यही प्रतिक्रिया मिलती थी। लोग कहते थे कि हम आपके लिये नहीं बल्कि अमेरिकियों के लिये ऐसा कहते हैं।''

अरब की काली मुस्लिम महिला मक्की ने कहा, ''अश्वेत विरोधी सोच की यही तस्वीर है, विशेषकर अफ्रीकी अमेरिकियों को लेकर।''

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अमेरिका के काले और श्वेत मुस्लिम भी मक्की की तरह सोच रखते हैं, क्योंकि वे नस्लीय निष्पक्षता, तनाव और अपने स्वयं के धार्मिक समुदायों के बीच भी इस तरह के सवालों से जूझते हैं।

मक्की ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा, ''कहीं, 70 के दशक से यहां रह रहे अंकल तो कहीं एक सेवानिवृत्त डॉक्टर, कहीं मस्जिद प्रबंधन के सेवानिवृत सदस्य तो कहीं उपनगर में हाई स्कूल का छात्र...हर कोई इस बारे में बात कर रहा है।''

प्यू अनुसंधान केन्द्र के 2017 के सर्वेक्षण के अनुसार अमेरिका में नस्लीय और जातीय आधार पर मुस्लिम समुदाय के बीच विविधता है। यहां कोई भी जातीय या नस्लीय समूह बहु-संख्यक नहीं है। काले लोगों की तादाद 20 प्रतिशत है।

मुसलमानों के बीच नस्लवाद रोधी गठबंधन की कार्यकारी निदेशक मारगरी हिल कहती हैं कि मुस्लिम समुदायों के बीच इस मामले को लेकर दिलचस्पी बढ़ी है। वे सवाल पूछ रहे हैं और मांगें भी कर रहे हैं। वे पूछते हैं कि क्या उन्होंने फलां बयान देखा, क्या वह एक कार्यक्रम के लिये विषय बता सकती हैं? अरबी और बांग्ला में पढ़ने के लिये कुछ है? क्या काला अफ्रीकी अमेरिकी कहना ज्यादा उचित है? ?

उन्होंने कहा कि फ्लॉयड की मौत के बाद मुस्लिम समुदाय में जागरुकता आई है और अब वे नस्लवाद को लेकर अधिक जागरुक हो गए हैं।

एपी

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