जरुरी जानकारी | धानुका एग्रीटेक ने दो कृषि स्टार्टअप में निवेश किया, और में करने को तैयार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. कृषि रसायन कंपनी धानुका एग्रीटेक ने अबतक दो स्टार्टअप में निवेश किया है। धानुका एग्रीटेक ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि वह देश के कृषि क्षेत्र में युवा उद्यमियों की मदद के लिए ऐसी और कंपनियों में निवेश करने को तैयार है।

नयी दिल्ली, 10 मई कृषि रसायन कंपनी धानुका एग्रीटेक ने अबतक दो स्टार्टअप में निवेश किया है। धानुका एग्रीटेक ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा कि वह देश के कृषि क्षेत्र में युवा उद्यमियों की मदद के लिए ऐसी और कंपनियों में निवेश करने को तैयार है।

धानुका एग्रीटेक ने 2021 में गुरुग्राम की कृषि ड्रोन विनिर्माता आयोटेक वर्ल्ड एविगेशन में अल्पांश हिस्सेदारी के लिए 30 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी।

धानुका समूह के चेयरमैन आर जी अग्रवाल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘हमने दो स्टार्टअप में निवेश किया है। कई युवा उद्यमी हैं, जिनके पास बेहतरीन उत्पाद और प्रौद्योगिकियां हैं। हम उनका समर्थन करने के लिए तैयार हैं।’’

उन्होंने कहा कि अगर कंपनी को सही अवसर मिला तो वह ऐसी और स्टार्टअप इकाइयों में निवेश करेगी।

अग्रवाल ने कहा कि आयोटेकवर्ल्ड के पास काफी ऑर्डर हैं, क्योंकि अब कीटनाशकों के छिड़काव और अन्य गतिविधियों के लिए कृषि क्षेत्र में ड्रोन का तेजी से उपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि दूसरा स्टार्टअप जहां धानुका ने निवेश किया है, वह कृषि क्षेत्र के लिए मृदा सेंसर जैसे आईओटी और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित उपकरण बनाती है।

अग्रवाल ने कृषि क्षेत्र के साथ ड्रोन और एआई जैसी तकनीकी प्रगति के एकीकरण की वकालत की।

उन्होंने कहा, ‘‘ये प्रौद्योगिकियां फसल रोगों और कीटों के हमले की पहले से पहचान करने में मदद कर सकती हैं, साथ ही साथ खाद और पानी के कुशल उपयोग में सहायता कर सकती हैं। इन तकनीकों की मदद से किसान वास्तविक समय के आंकड़ों के आधार पर एकदम दुरुस्त निर्णय ले सकते हैं और अपनी फसल के लिए बेहतर योजना तैयार कर सकते हैं।’’

कृषि रसायन क्षेत्र की समस्याओं के बारे में बात करते हुए अग्रवाल ने कहा कि नकली कीटनाशकों की आपूर्ति एक बड़ी चुनौती है क्योंकि इससे किसानों और निर्माताओं दोनों के हितों को नुकसान पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि समानांतर बाजार में नकली उत्पादों की बिक्री के खतरे को रोकने के लिए कंपनी ने पहले ही अपने सभी उत्पादों पर क्यूआर कोड अपनाया है।

उन्होंने कहा कि घटिया/नकली/तस्करी किए गए/नकली कीटनाशकों की बिक्री से फसल की पैदावार और किसानों की आय पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि कम गुणवत्ता वाले उत्पाद कीटों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने में विफल रहते हैं, जिसके फसल का भारी नुकसान होता है।

धानुका समूह की तीन विनिर्माण इकाइयां गुजरात, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में हैं। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में करीब 1,500 करोड़ रुपये का कारोबार किया था।

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